प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों विपक्षी दलों पर पेट्रोल की कीमतों पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जहां भी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है, उन राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये से कम है, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में कीमत 100 रुपये से ज्यादा है। कांग्रेस ने भी पीएम के बयान पर पलटवार किया। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि पीएम ने दामों की जो लिस्ट पढ़ी, वो गलत है।
भाजपा या एनडीए शासित राज्यों में पेट्रोल के दाम की स्थिति क्या है? कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में पेट्रोल के दाम की स्थिति क्या है? आखिर पेट्रोल के दाम कैसे तय होते हैं? आइये जानते हैं…
पेट्रोल पंप
- फोटो : संवाद
एनडीए शासित राज्यों में पेट्रोल के दाम की स्थिति क्या है?
एनडीए शासित राज्यों में पेट्रोल के दामों की बात करें तो सबसे ज्यादा कीमत मध्य प्रदेश में है। शुक्रवार को प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल 108.63 रुपये लीटर था। इसके बाद महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 106.29 रुपए, सिक्किम (गंगटोक) में 102.9, मणिपुर (इंफाल) में 101.19 और त्रिपुरा (अगरतला) में 99.49 रुपये लीटर बिका।
एनडीए शासित इन राज्यों में राज्यों पेट्रोल सौ या उसके पार
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भाजपा शासित राज्य
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राजधानी
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राजधानी में पेट्रोल कितने रुपये लीटर
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मध्य प्रदेश
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भोपाल
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108.63
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महाराष्ट्र
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मुंबई
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106.29
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सिक्किम
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गंगटोक
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102.9
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मणिपुर
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इंफाल
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101.19
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त्रिपुरा
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अगरतला
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99.49
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नगालैंड
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कोहिमा
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99.44
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पेट्रोल के दाम
- फोटो : सोशल मीडिया
एनडीए शासित किन राज्यों में पेट्रोल सौ रुपये से नीचे है?
भाजपा और उसके सहयोगियों की इस वक्त 15 राज्यों में सरकार है। इनमें से चार राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये के ऊपर बिक रहा है। वहीं, त्रिपुरा और नगालैंड में भी इसके दाम करीब सौ रुपये हैं। बाकी, नौ राज्यों के लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए सौ रुपये से कम खर्च करने पड़ते हैं।
भाजपा शासित इन राज्यों में सबसे सस्ता पेट्रोल
भाजपा शासित राज्यों में सबसे सस्ता पेट्रोल अरुणाचल प्रदेश में मिल रहा है। राज्य की राजधानी ईटानगर में शुक्रवार को पेट्रोल का दाम 92.76 रुपये रहा। इसके बाद उत्तराखंड (देहरादून) में 95.27 रुपये, मिजोरम (आईजोल) में 95.71 रुपये, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) में 96.55 रुपये और गुजरात (गांधीनगर) में ये दाम 96.62 रुपये रहे।
एनडीए शासित इन राज्यों में राज्यों पेट्रोल सौ से कम
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भाजपा शासित राज्य
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राजधानी
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राजधानी में पेट्रोल कितने रुपये लीटर
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अरुणाचल प्रदेश
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ईटानगर
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92.76
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उत्तराखंड
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देहरादून
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95.27
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मिजोरम
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आईजोल
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95.71
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उत्तर प्रदेश
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लखनऊ
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96.55
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गुजरात
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गांधीनगर
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96.62
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मेघालय
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शिलॉन्ग
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97.46
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असम
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गुवाहाटी
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97.51
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गोवा
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पणजी
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97.66
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हरियाणा
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चंडीगढ़
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97.8(पंचकूला)
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पेट्रोल के दाम
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या सभी गैर भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल सौ के पार है?
इस वक्त दिल्ली समेत कुल 14 राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें हैं। इनमें चार राज्यों को छोड़कर बाकी दस राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये से ज्यादा महंगा बिक रहा है। आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में देश में सबसे महंगा पेट्रोल मिलता है। अमरावती में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 111.59 रुपये प्रति लीटर रही। इसके बाद केरल (तिरुवनंतपुरम) में 109.71 रुपये, तेलंगाना (हैदराबाद) में 109.64 रुपए, राजस्थान (जयपुर)में 108.46 रुपए और बिहार (पटना) में 107.22 रुपए।
इन गैर भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल 100 के पार
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गैर भाजपा शासित राज्य
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राजधानी
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राजधानी में पेट्रोल कितने रुपये लीटर
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आंध्र प्रदेश
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अमरावती
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111.59
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केरल
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तिरुवनंतपुरम
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109.71
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तेलंगाना
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हैदराबाद
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109.64
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राजस्थान
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जयपुर
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108.46
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बिहार
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पटना
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107.22
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पश्चिम बंगाल
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कोलकाता
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106.01
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ओडिशा
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भुवनेश्वर
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103.17
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तमिलनाडु
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चेन्नई
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102.62
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छत्तीसगढ़
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रायपुर
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102.44
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कर्नाटक
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बेंगलुरु
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101.92
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किन गैर-भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल सौ से कम?
कुल चार गैर-भाजपा शासित राज्यों की राजधानियों में पेट्रोल सौ रुपये से कम बिक रहा है। इसमें से झारखंड और पंजाब में इसकी कीमत सौ रुपये के करीब है। वहीं, हिमाचल और दिल्ली में यह 96 और 97 रुपये से कुछ ज्यादा है।
गैर-भाजपा शासित राज्यों में सबसे सस्ता पेट्रोल दिल्ली में मिलता है। नई दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल 96.76 रुपये प्रति लीटर रहा। वहीं, हिमाचल प्रदेश (शिमला) में 97.24 रुपये, पंजाब (मोहाली) में 99.02 रुपये, झारखंड (रांची) में 99.82 रुपये और कर्नाटक (बेंगलुरु) में 101.92 रुपये रहा।
फ्लेक्स फ्यूल और पेट्रोल में अंतर
- फोटो : सोशल मीडिया
कैसे तय होते हैं पेट्रोल के दाम?
आमतौर पर माना जाता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत से तय होती है। तेल कंपनियां यह देखती हैं कि पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भावों का औसत क्या है, उसी हिसाब से दाम तय किए जाते हैं। यानी जब कच्चे तेल के दाम घटते या बढ़ते हैं तो उसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
कई तरह के टैक्स से बढ़ जाती है कीमत
दरअसल, इन उत्पादों पर लगने वाले टैक्स घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेट्रोल की कीमत बढ़ने का एक प्रमुख कारण स्थानीय करों की ज्यादा वसूली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो, लेकिन उसका असर घरेलू बाजार में इसलिए नहीं होता है क्योंकि आम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते सरकार कई तरह के टैक्स लगा देती है। पहले इस पर उत्पाद शुल्क और उपकर लगाती है, जिससे सरकार को राजस्व मिलता है।
राज्य सरकार वसूलती है वैट
इसके अलावा राज्य सरकारें बिक्री कर या वैट वसूलती हैं। उसके बाद माल भाड़ा, डीलर कमीशन, वैल्यू एडेड टैक्स जुड़ जाता है। उदाहरण के लिए दिल्ली में पेट्रोल की कीमत को समझें। यहां पेट्रोल का बेस प्राइस 57.15 रुपये प्रति लीटर है। माल ढुलाई 0.20 रुपये प्रति लीटर, उत्पाद शुल्क 19.90 रुपये प्रति लीटर, डीलर कमीशन (औसत) लीटर 3.76 रुपये प्रति लीटर और वैट (डीलर कमीशन पर वैट सहित) 15.71 रुपये प्रति लीटर। इन सबको जोड़कर दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
ओपेक देश
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कौन तय करता है कीमत?
भारत मुख्य रूप से आयात के माध्यम से अपनी घरेलू तेल की मांग को पूरा करता है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगवाता है। कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ही तय करता है। भारत को भी उसी कीमत पर कच्चा तेल खरीदना पड़ता है, जो ओपेक तय करता है। सरकारी तेल कंपनिया पेट्रोल-डीजल की कीमत रोज तय करती हैं। इसके साथ ही भारत रूस से भी तेल आयात करता है।