हाल ही में हुई पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी इस साल भी रहने की आशंका है, जिससे आपके घर का बजट काफी बिगड़ सकता है। दिसंबर से लेकर के अभी तक पेट्रोल के दामों में तीन बार और डीजल के दाम में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है। नए साल की शुरूआत भी पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई थी।
तब पेट्रोल के दाम में 1 रुपये 29 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 0.97 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी करने के कारण इस साल पेट्रोल-डीजल के दाम काफी ज्यादा बढ़ सकते हैं।
इराक-साउदी अरब ने लगाया प्रीमियम सरचार्ज
भारत को 40 फीसदी कच्चा तेल एक्सपोर्ट करने वाले इराक और साउदी अरब ने एशियाई देशों और यूएस में आपूर्ति करने पर प्रीमिय सरचार्ज लगा दिया है। इससे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। डॉलर की गिरती कीमत से भी अर्थव्यवस्था पर काफी बोझ पड़ने की उम्मीद है। भारत इन दोनों देशों से करीब 80 फीसदी तेल इंपोर्ट करता है।
2020 तक कीमतों में बढ़ोतरी रहने का अनुमान
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में आई मंदी, रुपए की गिरती कीमत और तेल के उत्पादन में कटौती होने से 2020 तक इनके दाम कम होने की संभावना काफी कम है। पहले से नोटबंदी के कारण चौतरफा आलोचना का शिकार हुई मोदी सरकार के अन्य सुधारों से जुड़े कार्यक्रम पर भी असर पड़ सकता है।
अगर पेट्रोल-डीजल के दाम यू हीं बढ़ते रहे, तो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा। अभी कच्चे तेल के एक बैरल की कीमत 60 डॉलर है, जो कि 2018 से 2020 तक 112 डॉलर तक पहुंच सकती है।
सरकार को कम करनी पड़ सकती है एक्साइज ड्यूटी
अगर तेल के दामों में बढ़ोतरी हुई तो मोदी सरकार को एक्साइज ड्यूटी को कम करना होगा जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर रह सकें और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में इसका ज्यादा असर न पड़े। 2015-16 में कच्चे तेल के दाम कम रहने से सरकार को तेल बिल पर काफी बचत हुई थी,
जिससे उसने कई सारे विकास से जुड़े कार्यक्रमों को शुरू किया था। अगर तेल के दाम बढ़ते हैं, तो सरकार को काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा और जनता को पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एलपीजी सिलेंडर पर दी जा रही सब्सिडी में काफी कटौती करनी पड़ेगी। इससे घर का बजट बिगड़ने की काफी संभावना है।