पेट्रोल के मुद्दे पर वैट कम करने की पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद विपक्ष भी हमलावर हो गया है। वह केंद्र से अपनी एक्साइज ड्यूटी कम करने और अन्य भाजपा शासित राज्यों में वैट कम करने की दलीलें देने लगा है। लेकिन इस बीच आम उपभोक्ताओं के संकट का कोई हल निकलता दिखाई नहीं पड़ता, जो महंगाई के कारण परेशान हैं और उसका घर चलाना मुश्किल हो रहा है। अमर उजाला ने ऊर्जा विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर बातचीत की कि जनता को महंगाई से बचाने के लिए क्या उपाय किये जा सकते हैं?
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला को बताया कि भारत प्रतिदिन 52 लाख बैरल तेल की खपत करता है। इस पूरी खपत का 86 फीसदी तेल भारत को विदेशी बाजार से आयात करना पड़ता है। चूंकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, अनुमान है कि आने वाले समय में भी तेल कीमतों की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। यदि रूस-यूक्रेन विवाद का समाधान हो जाए तो भी आने वाले समय में कई वर्षों तक तेल कीमतों पर संकट लगातार बरकरार रहेगा और आम आदमी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
केंद्र सरकार के पूर्व सचिव अजय शंकर ने अमर उजाला से कहा कि जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के अंदर लाना चाहिए। टैक्स पाने के कारण ज्यादातर सरकारें इसके लिए इच्छुक नहीं हो सकतीं, लेकिन एकत्रित टैक्स को उचित तरीके से केंद्र-राज्य में बंटवारा कर इस समस्या का सर्वमान्य हल निकाला जा सकता है। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर साथ आकर खुले मन से बातचीत करनी चाहिए।
अजय शंकर का मानना है कि आज एक आम भारतीय उपभोक्ता जब बाजार से कोई वस्तु खरीदता है, उसके द्वारा चुकाए गए कुल मूल्य का लगभग 14-15 फीसदी हिस्सा केवल परिवहन-लॉजिस्टिक्स लागत के कारण होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह कीमत केवल छह फीसदी के करीब होती है।
जानकारों का कहना है कि तेल की सबसे ज्यादा खपत यात्री और माल परिवहन के लिए होती है। यदि यात्री परिवहन के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों की खपत में कमी आ सकती है। इससे भी तेल की खपत कम होगी, महंगाई का असर कम होगा और देश पर तेल आयात पर खर्च कम हो सकेगा।
परिवहन के लिए तेल पर निर्भर रहने की बजाय ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। अभी बैटरी से चलने वाली कारों की कीमत पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। इसे कम कर अन्य कारों के बराबर लाया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को हाइड्रोजन और आणुविक ऊर्जा से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ना चाहिए। ये ईंधन भविष्य के ऊर्जा स्रोत कहे जा रहे हैं। इनका समय रहते पर्याप्त दोहन किया जाना चाहिए।