देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी कर दी है। सरकार के इस कदम को आम आदमी के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सियासी गलियारों में इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी सांसदों ने इस फैसले को 'चुनावी स्टंट' बताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।
विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया गया फैसला- पवन खेड़ा
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती केवल राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए की गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह राहत वास्तविक नहीं बल्कि असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनता को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जब पिछले 12 वर्षों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें सात बार गिरीं, तब सरकार ने आम जनता को इसका लाभ नहीं दिया, बल्कि 21 बार टैक्स में बदलाव कर अपनी तिजोरी भरी।
पवन खेड़ा ने तर्क दिया कि दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब भी उतनी ही बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह कटौती केवल तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए है, न कि आम आदमी की जेब के लिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि 30 अप्रैल को चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही सरकार फिर से कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर सकती है, जैसा कि पूर्व में भी देखा गया है।
प्रचार की जरूरत क्या है-मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि राजस्व का असली मालिक जनता है। सरकार जो टैक्स वसूलती है, वह जनता की ही जेब से आता है। अगर सरकार आज उसी टैक्स में थोड़ी कटौती कर रही है, तो वह अपने खजाने से कुछ नहीं दे रही। यह जनता का ही पैसा है जो उन्हें वापस मिल रहा है, तो फिर इसका इतना ढोल पीटने की क्या आवश्यकता है?
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पेट्रोल पंपों पर ईंधन ही उपलब्ध नहीं- मीसा भारती
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने इस कटौती को ऊंट के मुंह में जीरे जैसा बताया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा कि भले ही कागजों पर कीमतें कम कर दी गई हों, लेकिन हकीकत यह है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन ही उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहे एलपीजी हो या पेट्रोल-डीजल, हर जगह लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। किल्लत इतनी ज्यादा है कि आम आदमी का रोजमर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जब सामान मिलेगा ही नहीं, तो सस्ती कीमत का क्या फायदा?
आपातकाल जैसे हालात-सागरिका घोष
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन हफ्तों से सरकार देश को गुमराह कर रही थी कि तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक है। घोष ने कहा कि अब जब स्थिति बेकाबू हो गई और 'आपातकाल' जैसे हालात बन गए, तब सरकार की नींद टूटी है। छोटे रेस्टोरेंट, मजदूर, छात्र और बुजुर्ग इस किल्लत से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। अगर सरकार ने समय रहते कदम उठाए होते, तो आज देश को यह दिन नहीं देखना पड़ता। बताते चलें कि सरकार इस फैसले को जहां मास्टरस्ट्रोक बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'देर आए, पर दुरुस्त नहीं आए' वाली श्रेणी में रख रहा है।
चुनावी स्टंट है यह कटौती- डीके शिवकुमार
वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार के फैसले को पूरी तरह 'चुनावी स्टंट' करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कटौती केवल आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए की गई है। शिवकुमार ने निजी तेल कंपनियों की ओर से बढ़ाए जाने वाले कीमतों को लेकर कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम केवल छलावा है। इसकी असलियत जल्द ही राज्य की जनता के सामने उजागर करेंगे।