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Supreme Court: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

Fri, 10 Jan 2025 01:02 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। इसी 33 फीसदी में से एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023' के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। कोर्ट ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने वाले अधिनियम को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। 
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सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जया ठाकुर और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन (एनएफआईडब्ल्यू) द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने बताया कि जया ठाकुर की याचिका में नारी शक्ति वंदन विधेयक को चुनौती दी गई थी। जबकि एनएफआईडब्ल्यू ने कानून के परिसीमन को चुनौती दी थी।

कोर्ट ने जया ठाकुर की याचिका को निरर्थक बताकर खारिज कर दिया। वहीं एनएफआईडब्ल्यू की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। वह उच्च न्यायालय या किसी अन्य उचित मंच पर जा सकती है। एनएफआईडब्ल्यू ने अधिनियम के खंड 5 की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी थी। 
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यह है नारी शक्ति वंदन अधिनियम
19 सितंबर 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पेश हुआ था। 20 सितंबर को लोकसभा में पास होने के बाद 21 सितंबर को यह राज्यसभा से पारित हुआ। बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण का प्रावधान है। 

कानून को अमल में लाने के लिए क्या करना होगा?
इस अधिनियम अमल में लाने से पहले दो शर्तों को पूरा करना होगा। ये शर्तें जनगणना और परिसीमन की हैं जिन्हें पूरा करने में कई साल लग सकते हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुताबिक, महिला आरक्षण कानून आगामी जनगणना के बाद लागू होगा। कानून बनने के बाद होने वाली जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने के लिए नए सिरे से परिसीमन होगा। परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी।

अमल में आने के बाद क्या बदलेगा?
मौजूदा समय में लोकसभा में कुल सदस्य संख्या 543 है। इस वक्त महिला सांसदों की संख्या 82 है। अधिनियम लागू होने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी।  इस अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद- 239AA के तहत राजधानी दिल्ली की विधानसभा में भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा। यानी, दिल्ली विधानसभा में भी 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा। 
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