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संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली, योगी के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका 

Fri, 24 Jan 2020 10:24 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर योगी सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। यूपी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनसे वसूली करने का आदेश दिया है। परवेज आरिफ द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि यूपी सरकार का यह निर्णय सही नहीं है। इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

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याचिका में प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाओं की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते याचिका पर सुनवाई कर सकता है। 

 



बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में गत 19 दिसंबर को लखनऊ में हिंसा व आगजनी से करीब 4.55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। चार एडीएम की एकल कमेटी ने सार्वजनिक व निजी संपत्तियों के नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। नुकसान की भरपाई को उपद्रव, आगजनी व हंगामे में चिह्नित 150 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही नुकसान की भरपाई के लिए वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

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वहीं, 20 दिसंबर को मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा के मामले में पांच लोगों द्वारा किसी तरह का जवाब एडीएम प्रशासन के समक्ष नहीं दाखिल किया गया। इसके चलते उक्त लोगों के खिलाफ अब जुर्माना निर्धारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सीएए के विरोध में 20 दिसंबर को शहर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। हिंसा में कुल 56.8 लाख रुपये की निजी व सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ था। मामले में एडीएम प्रशासन अमित सिंह द्वारा शहर के 46 लोगों को चिह्नित करते हुए उन्हें नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 35 लोगों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर एडीएम प्रशासन के समक्ष अपना स्पष्टीकरण दाखिल कर दिया था। शेष 11 लोगों को फिर से नुकसान क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी कर 20 जनवरी तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे। 

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