सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चार वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 14 जनवरी की अधिसूचना को चुनौती दी है। इस अधिसूचना के तहत दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालतों में प्रत्यक्ष (फिजिकल) अदालत शुरू करने की इजाजत दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बावजूद वकीलों को वर्चुअल अदालत का विकल्प न देना स्वास्थ्य की अनदेखी करना है।
वकील कार्तिक नायर, नैंसी रॉय, सचित जॉली और अमित भगत द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट की अधिसूचना को दरकिनार करने की अपील की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वकीलों को वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में पेश होने की इजाजत दी जाए। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने इस बात को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया कि निचली अदालतों में प्रोटोकॉल और एसओपी का पालन एक तरह से नामुमकिन है क्योंकि वहां कोर्ट रूम काफी छोटे होते हैं और भीड़ भी होती है।
याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि अगर निचली अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई पूरी तरीके से बहाल की गई तो यह काफी घातक हो सकता है और कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। याचिका में राजस्थान और मद्रास हाईकोर्ट का हवाला दिया गया है जहां प्रत्यक्ष अदालतों को बंद करने का निर्णय लिया गया।
कहा गया है कि हाईकोर्ट की अधिसूचना मौलिक रूप से गलत है। इससे काफी असुविधा होगी और वकीलों में अफरातफरी की स्थिति होगी क्योंकि उनके लिए एक ही दिन में प्रत्यक्ष और वर्चुअल सुनवाई में शामिल होना संभव नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव के लिए गठित समिति के सदस्यों का इस्तीफा
सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन का इस साल चुनाव कराने के लिए गठित समिति के सभी तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। समिति में हरेन पी रावल और नकुल दीवान भी शामिल थे। इससे पहले बृहस्पतिवार को एससीबीए के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने इस्तीफा दे दिया था।
समिति सदस्यों ने बार एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव रोहित पांडे को एक संयुक्त पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि उन्होंने डिजिटल माध्यम से चुनाव कराने का फैसला किया था और इसके लिए डिजिटल कंपनी एनएसडीएल से बात की थी। चुनाव पर अनुमानित खर्च की जानकारी 14 जनवरी को बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति को भेज दी गई थी। बार एसोसिएशन के कुछ नेता डिजिटल माध्यम से चुनाव कराने के खिलाफ हैं।