चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज कर देना चाहिए।
कोर्ट में दायर हलफनामे में आयोग ने कहा कि वकील एमएल शर्मा की यह याचिका त्रुटिपूर्ण है और गलत तथ्यों पर आधारित है। याचिका में दी गई जानकारी गुमराह करने वाली है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
नीतीश कुमार ने वर्ष 2012 और 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। साथ ही वर्ष 2013 में नीतीश कुमार विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़े थे।
आयोग ने कहा है कि पता नहीं याचिकाकर्ता को ये चुनावी हलफनामे कैसे मिले जबकि उस वर्ष नीतीश कुमार ने चुनाव ही नहीं लड़ा था।
शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि नीतीश ने सालों तक चुनावी हलफनामे में यह जानकारी नहीं दी कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है।
याचिका में कहा गया कि नीतीश एक स्थानीय कांग्रेस नेता सीताराम सिंह की हत्या के मामले में आरोपी हैं। वर्ष 1991 में बाढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव से पहले की यह घटना है।
चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों के लिए नामांकन के वक्त हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का जिक्र करना जरूरी है लेकिन नीतीश कुमार ने सालों तक अपने हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया।
वर्ष 2012 के हलफनामे में नीतीश ने इस मुकदमे की जानकारी दी थी। याचिका में कहा गया कि चूंकि सालों तक नीतीश ने जानकारी को छिपाए रखा, इसलिए उनकी विधान परिषद की सदस्यता रद्द होनी चाहिए।