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फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट से कहा- दिल्ली जैसी हिंसा के पीछे इनका हाथ

Wed, 04 Mar 2020 07:44 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुफ्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिका दायर कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के बारे में पता लगाने और उनके के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में दावा किया है कि फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट सांप्रदायिकता, कट्टरपंथ, अलगाववाद आदि को बढ़ावा देते हैं और हाल में दिल्ली हिंसा समेत दूसरे दंगों के मूल कारणों में से एक है।

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उन्होंने अपनी विशेष अवकाश याचिका (एसपीएल) में दिल्ली हाईकोर्ट के 9 दिसंबर, 2019 के उचित पहचान प्रमाण के साथ सोशल मीडिया अकाउंट को जोड़ने से संबंधित आदेश को चुनौती दी है। तब हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि एक छोटा सा अच्छा काम करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट को हटाकर सही यूजर्स के डेटा को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। याचिका में दावा किया गया है कि भारत में ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर करीब दस प्रतिशत अकाउंट फर्जी हैं। 

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साइबर अपराध रोकने के लिए गृहमंत्री ने लॉन्च किया था पोर्टल

बता दें कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट के बारे में पता लगाने और उनके के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर भले ही यह नई याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। लेकिन इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह साइबर दुनिया में अपराध पर लगाम कसने के लिए जनवरी में एक पोर्टल लॉन्च कर चुके हैं। इस पोर्टल पर साइबर अपराध के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। 

जनवरी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अत्याधुनिक साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (आई4सी) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उद्घाटन किया था। इस पोर्टल पर दर्ज रिपोर्ट के आधार पर संबंधित राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसी तय कानून के तहत जांच करती हैं।

www.cybercrime.gov.in पोर्टल से अब तक करीब 700 जिलों के 3900 पुलिस स्टेशनों को जोड़ा गया है। यह पोर्टल विशेष रूप से वित्तीय मामले और सोशल मीडिया संबंधित मामले जैसे पीछा करना और साइबर बुलिंग पर कार्रवाई करने में मदद करता है।
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