सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिका दायर कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के बारे में पता लगाने और उनके के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में दावा किया है कि फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट सांप्रदायिकता, कट्टरपंथ, अलगाववाद आदि को बढ़ावा देते हैं और हाल में दिल्ली हिंसा समेत दूसरे दंगों के मूल कारणों में से एक है।
उन्होंने अपनी विशेष अवकाश याचिका (एसपीएल) में दिल्ली हाईकोर्ट के 9 दिसंबर, 2019 के उचित पहचान प्रमाण के साथ सोशल मीडिया अकाउंट को जोड़ने से संबंधित आदेश को चुनौती दी है। तब हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि एक छोटा सा अच्छा काम करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट को हटाकर सही यूजर्स के डेटा को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। याचिका में दावा किया गया है कि भारत में ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर करीब दस प्रतिशत अकाउंट फर्जी हैं।