एक शोध अध्ययन के अनुसार भूमि के ऊपर, भूमि उपयोग, जलवायु परिवर्तन और आक्रामक प्रजातियों का जैव विविधता पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, इसलिए माना जा रहा था कि यह जमीन के नीचे भी ऐसा ही होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। इसके बजाय शोध कीटनाशक और भारी धातु के प्रदूषण ने मिट्टी की जैव विविधता को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।
जमीन के अंदर रहने वाले जीवों में कमी आने का सबसे बड़ा कारण मिट्टी का प्रदूषण है। इससे पहले माना जाता था कि अंधाधुंध खेती और जलवायु परिवर्तन इस तरह की समस्याओं को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
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एक शोध अध्ययन के अनुसार भूमि के ऊपर, भूमि उपयोग, जलवायु परिवर्तन और आक्रामक प्रजातियों का जैव विविधता पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, इसलिए माना जा रहा था कि यह जमीन के नीचे भी ऐसा ही होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। इसके बजाय शोध कीटनाशक और भारी धातु के प्रदूषण ने मिट्टी की जैव विविधता को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। यह चिंताजनक है, क्योंकि मिट्टी के प्रदूषण के प्रभावों पर बहुत अधिक शोध नहीं हुआ है। इसलिए इसके प्रभाव जितना हम जानते हैं उससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं।
आई-साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित इस नए शोध में इस बात को समझने के लिए टीम ने मेटा-विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं की टीम ने 600 से अधिक अध्ययनों के आंकड़ों का फिर से उपयोग किया। इसमें हजारों अलग-अलग डेटापॉइंट शामिल थे ताकि यह देखा जा सके कि दुनिया भर में मिट्टी के स्वास्थ्य पर इंसानों का क्या असर पड़ रहा है। शोध के परिणामों के आधार पर जमीन के ऊपर और नीचे के जीव आम तौर पर एक ही मुद्दे पर बहुत अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं।
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केंचुओं की कमी से पेड़-पौधों के वास्तविक विकास पर असर
मिट्टी नमी और पोषक तत्वों को जमा कर सकती है जो बहुत छोटी अवधि के दौरान जमीन के अंदर रहने वाले जीवों को बदलावों का सामना करने में मदद कर सकती है। जबकि जलवायु परिवर्तन सतह पर अधिक से अधिक प्रजातियों को प्रभावित कर रहा है, इसके जमीन के अंदर प्रभाव अभी सीमित प्रतीत होते हैं।
जैविक खाद और गीली घास का उपयोग मिट्टी में अधिक कार्बन के लिए जाना जाता है। यह केंचुओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। केंचुए पोषक तत्वों को खाते हैं और उन्हें मिट्टी में चक्रित करते हैं।