बाघों को मारकर उनकी खाल और अन्य अंगों की तस्करी के आरोप में कुछ दिनों पहले पुलिस और वन विभाग की टीम के हत्थे चढ़े हरि गुरो से पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं।
हरि गुरो ने कबूल किया है कि बुढ़ापे से दूर रहकर हमेशा जवान बना रहने के लिए वह बाघ के मीट और खून को अपनी खुराक में शामिल करता था। बाद में खाल और बाघ के बाकी अंगों को बेच देता था। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने कुछ दिन पहले मारी गई मादा बाघ का शव भी जंगल से बरामद किया है।
यूपी से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों को मार डालने की घटनाएं तेजी से बढ़ने पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कॉम्बिंग के दौरान जनवरी में बैरिया कला गांव से चंद्रदेव महतो और कृष्ण देव को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो बाघ की खाल और हड्डियां बरामद की गई थीं।
इनसे मिले सुराग के आधार पर बिहार के ही रहने वाले भोला साह, सत्येंद्र ठाकुर, वंशराज, जितेंद्र तथा महराजगंज (यूपी) के प्रद्युम्न चौधरी को गिरफ्तार किया था। इसी क्रम में कुछ दिन पहले बिहार के गोनौली गांव का हरि गुरो छापामार टीम के हत्थे चढ़ा।
अब 72 घंटे की रिमांड पर लेकर शुरू की गई पूछताछ में बाघों के रक्त और मीट को आहार बनाने की बात सामने आने पर जांच टीम के होश उड़ गए। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने मंगलवार को गोनौली वनक्षेत्र के मुसहरिया नाले के पास से कुछ दिन पहले शिकार की गई मादा बाघिन का शव भी बरामद किया है।
उसने अब तक नौ बाघों को मारने की बात स्वीकार की है। पुलिस और वन विभाग की टीम उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश में है जो बाघों तथा अन्य वन्य जीवों के अंग और खाल के खरीदार थे।
बाघों के हत्यारे हरि गुरो को रिमांड पर लेकर की गई पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने के बाद एक बाघिन का शव भी बरामद किया गया है। इस गैंग में शामिल और लोगों तक पहुंचने की कोशिश है। वन्य क्षेत्र में सख्ती जारी रहेगी।
-अमित कुमार, डीएफ ओ, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व