फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन पर सरकार को घेर खुद फंसे राहुल गांधी

Mon, 17 Feb 2020 09:04 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन वह खुद ही इस मुद्दे पर फंस गए। 
विज्ञापन
राहुल गांधी - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने का फैसला दिया है, जिसपर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन वह इस मुद्दे पर खुद ही फंस गए। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में ही भारतीय सेना की महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के निर्देश दिया था, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। 

विज्ञापन


राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील देकर हर महिला का अपमान किया है कि महिला सैन्य अधिकारी कमान मुख्यालय में नियुक्ति पाने या स्थायी सेवा की हकदार नहीं हैं क्योंकि वे पुरुषों के मुकाबले कमतर होती हैं। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा सरकार को गलत साबित करने और खड़े होने के लिए भारत की महिलाओं को बधाई देता हूं।




उनके इस बयान के बाद महिला सैन्य अधिकारियों का केस लड़ने वाली वकील और भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी और हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील नवदीप सिंह ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार कोर्ट में गई थी, ना कि भाजपा। 
विज्ञापन


नवदीप सिंह ने कहा, 'हालांकि, महिला अधिकारियों को यह लाभ देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील 2010 में दायर किया गया था, जब वर्तमान सरकार सत्ता में नहीं थी। इसलिए, मेरा मानना है कि इस तरह के मुद्दों और न्यायिक फैसलों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।'





वहीं, भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा कि कृपया, राहुल गांधी अपने मेमोरी बटन को रिफ्रेश करें। यह कांग्रेस सरकार थी जिसने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष 2010 में सेना में महिलाओं के स्थाई कमीशन के खिलाफ विरोध किया था। 





सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को तब सरकार ने बिना किसी देरी के 2010 में लागू किया होता तो आज 14 से 20 साल सेवा में रह चुकीं महिला अधिकारी स्थाई कमीशन की हकदार होंती। यह सरासर सरकार की विफलता है कि उसने फैसले को लागू नहीं किया। 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह सेना की उन सभी महिला अधिकारियों को तीन महीने के भीतर स्थाई कमीशन प्रदान करे जिन्होंने इसके लिए आवेदन किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को कमान मुख्यालय पर नियुक्ति दिए जाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें शारीरिक सीमाओं और सामाजिक चलन का हवाला देते हुए सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं देने की बात कही गई थी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें