असम सरकार ने मंगलवार को दावा किया है कि एनआरसी सूची से छूटे जरूरतमंदों को सरकार कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित होने में चार दिन शेष रहते सरकार ने सूची में नाम नहीं आने से डरे हुए भारतीयों को राहत देने वाली घोषणा की है।
सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा विरोधी कांग्रेस भी एनआरसी में छूट रहे भारतीयों की मदद के लिए आगे आए हैं। तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सेंटर फॉर जस्टिस एंड पीस ने भी फाइनल एनआरसी के प्रकाशन के बाद नागरिकता से जुड़े जटिल मामलों को निपटाने में मदद की पेशकश की है। राज्य सरकार ने एनआरसी में नाम नहीं आने पर हटाए जाने के डर से सहमे लोगों को राहत देने के लिए कानूनी मदद देने की घोषणा की है। लोगों को डर है कि उन्हें नाम नहीं होने पर बांग्लादेश भेजा जा सकता है। असम के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कुमार संजय कृष्णा ने मंगलवार को कहा कि एनआरसी में नाम नहीं होने के बाद भी जब तक विदेशी न्यायाधिकरण किसी को विदेशी नागरिक नहीं घोषित कर देता उसे हटाया नहीं जा सकता।
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जून में हटाए गए थे एक लाख लोग
जून 2019 में छपी एनआरसी सूची में करीब एक लाख और लोगों के नाम हटा दिए गए थे।
अपील का मौका मिलेगा
कुमार संजय ने बताया कि जिनके नाम एनआरसी की अंतिम सूची में नहीं होंगे उनके पास नागरिकता की अनुसूची की धारा-8 के तहत अपील करने का मौका होगा। केंद्र ने अपील दायर करने की अवधि को 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दिया है। इसके अलावा करीब 200 न्यायाधिकरण इन अपीलों की सुनवाई के लिए बनाए जाएंगे।