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घर से दूर रहने वाले 33 प्रतिशत लोगों को सुरक्षा, 27 प्रतिशत को सताता है निजता का डर

Mon, 15 Oct 2018 10:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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22 देशों के 22 हजार लोगों पर एक अध्ययन किया गया है जिसमें उनसे पूछा गया कि घर से दूर रहने पर उन्हें कैसा महसूस होता है। जिसके जवाब काफी चौंकाने वाले हैं। 35 प्रतिशत लोगों का मानना है कि घर से दूर रहने पर वह चाहे जितने ऐशो-आराम के संसाधन जुटा लें, लेकिन उन्हें घर वाली भावना नहीं आती है। इसमें वह लोग शामिल हैं जो रोजगार या पढ़ाई के लिए घर से दूर रह रहे हैं। वहीं घर से बाहर रहने वालों में 33 प्रतिशत को अपनी सुरक्षा की तो 27 प्रतिशत को निजता की चिंता सताती है।   

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यह आंकड़े फर्नीचर कंपनी आईकिया द्वारा कराए गए सर्वे से सामने आए हैं। जिन 22 देशों पर अध्ययन किया गया है उनमें भारत भी शामिल है। अध्ययन में लोगों का कहना था कि नए घर में उन्हें मानसिक सुकून नहीं मिलता। इसी वजह से वह अकेला रहना पसंद करते हैं। 72 प्रतिशत लोगों का कहना है जब उन्हें मानसिक परेशानी महसूस होती है तो वह बेडरुम में अकेले बैठना पसंद करते हैं। ऐसी स्थिति में 45 प्रतिशत लॉन्ग ड्राइव पर जाते हैं जबकि 55 प्रतिशत खुद को बाथरुम में बंद कर लेते हैं। 

53 प्रतिशत लोगों ने माना कि नए शहर में बसाए गए घर में उन्हें अपनेपन का भाव नहीं आता है। यहां जितने संसाधन जुटा लें मगर उन्हें यह अपना नहीं लगता है। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें अपनापन सबसे ज्यादा किसके साथ महसूस होता है तो 57 प्रतिशत लोगों ने परिवार का नाम लिया। 34 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें दोस्तों के साथ अपनापन महसूस होता है। वहीं बाकी लोगों का कहना था कि उन्हें किसी के भी साथ अपनापन महसूस नहीं होता है।
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अध्ययन से पता चला है कि घर को कार्यस्थल के तौर पर इस्तेमाल करने का ट्रेंड बढ़ा है। 25 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वह दफ्तर जाकर काम करने की बजाए घर से ही काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। एक अन्य अध्ययन के अनुसार एशिया के लोग जिंदगी में औसतन 5 से 6 बार अपना घर बदलते हैं। जबकि अमेरिका और यूरोप में रहने वाले लोग औसतन 11 बार अपना आशियाना बदलते हैं। 

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