बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि उनके उत्तराधिकार का फैसला उनके अनुयायी करेंगे। उन्होंने कहा कि चीन को इसका हक नहीं है और चीन के इस प्रयास की उन्होंने कड़ी आलोचना की। बौद्ध धर्म गुरु ने शनिवार को यहां एक जनसभा में उनकी यात्रा को लेकर झूठी सूचना फैलाने के लिए चीन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजिंग के लिए उनकी आध्यात्मिक यात्रा को राजनीतिक रंग देना सामान्य बात है। दलाई लामा के अरुणाचल दौरे को लेकर चीन अपनी नाराजगी जताता रहा है।
तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा कि चीन के लोगों को उनके (दलाई लामा) बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उन्हें ऐसा उस वक्त महसूस हुआ जब वह अन्य देशों में चीनी नागरिकों से मिले। जब उनसे पूछा गया कि उनके तवांग, जिसे चीन अपना बताता है, के दौरे से भारत-चीन के रिश्तों पर असर पड़ेगा। इस पर उन्होंने कहा कि हमें इंतजार करना चाहिए। चीन के लिए मेरी आध्यात्मिक यात्रा को राजनीतिक रंग देना बेहद आम बात है। मेरी इच्छा है कि चीनी अधिकारी भी इस यात्रा में मेरे साथ होते और देखते कि क्या मैंने उनके खिलाफ कुछ भी बोला है?
गौरतलब है कि चीन ने वर्षों पहले दलाई लामा के उत्तराधिकारी को नामित कर दिया था और उसे अपना पंचेन लामा घोषित कर दिया था। पंचेन लामा सर्वोच्च पद दलाई लामा से एक पद नीचे होता है। उन्होंने चीन द्वारा उनका उत्तराधिकरी घोषित करने को तिब्बतियों की उपेक्षा बताया और उसे मूर्खतापूर्ण कार्य बताया। दलाई लामा ने बताया कि 1969 में उन्होंने तिब्बत के लोगों से पूछा था कि वह तय करें कि दलाई लामा का पद जारी रखना चाहते हैं या नहीं। यह यह पद आगे प्रासंगिक नहीं है तो इसे समाप्त कर देना चाहिए। ध्यान रहे कि दलाई लामा 1959 तिब्बत को छोड़कर तवांग में शरण ली थी।
दलाई लामा ने कहा कि कोई नहीं जानता कि अगला दलाई लामा कौन और कहां पैदा होगा। वरिष्ठ भिक्षुओं को दलाई लामा की मृत्यु के बाद उनके पुनर्जन्म के संकेत जिस किशोर में मिलते हैं उसे दलाई लामा चुन लिया जाता है, लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं हैं। उन्होंने अगले दलाई लामा के किसी महिला के बनने की संभावना से इनकार नहीं किया है। भाजपा सरकार की चीन नीति पर उन्होंने कहा कि यह कमोबेश नरसिम्हा राव के कार्यकाल वाली कांग्रेस सरकार जैसी ही है, लेकिन मैं नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करता हूं। वह काफी सक्रिय और विकासोन्मुखी हैं।