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Research: चिकनगुनिया रोगी को तीन माह तक जान का जोखिम, मच्छर काटने के बाद स्थिति बनती है गंभीर, सतर्कता जरूरी

Thu, 15 Feb 2024 05:44 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अध्ययन के अनुसार, चिकनगुनिया के अधिकांश रोगी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ मरीजों में यह जानलेवा भी बन सकता है। पिछले साल 2023 में इस बीमारी की वजह से दुनिया भर में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।  
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विस्तार
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मच्छर जनित रोग चिकनगुनिया का जोखिम मरीजों पर तीन महीने तक रह सकता है। यह जानकारी एक चिकित्सा अध्ययन में सामने आई है जिसे द लैंसेट इनफेक्शियस डिजीज जर्नल में प्रकाशित किया है। इसके अनुसार, चिकनगुनिया की चपेट में आने के बाद जब संक्रमण शरीर में बढ़ने लगता है तो रोगी की स्थिति गंभीर होती है।

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चिकित्सीय तौर पर रोगी एंटीबायोटिक्स और अन्य सहायक उपचार से ठीक भी हो सकता है लेकिन इसके बाद भी निगरानी बहुत जरूरी है क्योंकि उसकी जान का जोखिम तीन महीने तक बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलती है। एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के जरिए फैलने वाली इस बीमारी का सबसे ज्यादा प्रकोप बीते 2016 और 2017 में देखने को मिला जब देश में 20 हजार से भी ज्यादा मामले पहली बार सामने आए।

पिछले वर्ष 400 लोगों की जान गई थी
अध्ययन के अनुसार, चिकनगुनिया के अधिकांश रोगी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ मरीजों में यह जानलेवा भी बन सकता है। पिछले साल 2023 में इस बीमारी की वजह से दुनिया भर में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बीते साल पांच लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आए।
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लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसएचटीएम) के एसोसिएट प्रोफेसर एनी दा पैक्साओ क्रूज का कहना है कि चिकनगुनिया संक्रमण का उपचार करते समय यह जानकारी रखना बहुत जरूरी है कि संक्रमण का तीव्र चरण समाप्त होने के बाद भी रोगी की जान का जोखिम बना रहता है। करीब 1.50 लाख से ज्यादा मरीजों पर किए इस अध्ययन में प्रो. क्रूज ने बताया कि आमतौर पर चिकनगुनिया के रोगी में लक्षण शुरू होने के बाद से 14 दिन तक संक्रमण का तीव्र चरण होता है।

बीमारी की सटीक दवा अब तक नहीं...
शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और मानव गतिशीलता में वृद्धि के कारण आबादी के बीच मच्छरों का प्रसार बढ़ा है। ऐसे में सभी देशों को मच्छर जनित रोगों के खिलाफ काम करना चाहिए क्योंकि इन बीमारियों का सटीक उपचार अब तक दुनिया के पास नहीं है।

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