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जनता अखिलेश के नाम पर वोट दे रही है, हमारी सरकार बनेगी: नरेश अग्रवाल

Wed, 15 Feb 2017 04:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेश अग्रवाल - फोटो : file photo
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चुनाव संग्राम में अखिलेश को भले साइकिल मिल गई हो मगर उनको मुलायम सिंह के आशीर्वाद को लेकर सवाल अभी भी खड़े हैं। पिता-पुत्र के रिश्तों और प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार को लेकर सपा महासचिव और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल से धीरज कनौजिया ने बातचीत की
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- पहला चरण हो चुका है। सपा का चुनावी आकलन क्या है?
इस बार वे मतदाता सपा को वोट दे रहा है जो पहले कभी इसे वोट नहीं देता था। अखिलेश का नेतृत्व सबको स्वीकार्य है। जनता अखिलेश के नाम पर वोट कर रही है। हमारी सरकर बनेगी।

- मगर नेता जी चुनाव प्रचार में अखिलेश का नाम नहीं ले रहे। क्या उनके मन में अभी भी फांस अटकी हुई है?
देखिये, अखिलेश जिंदगी भर नेता जी के पुत्र रहेंगे। वहीं मुलायम सिंह अखिलेश के जिंदगी भर पिता रहेंगे। कोई नाम ले या न ले, इससे क्या अंतर पड़ता है। वैसे भी हर जगह पुत्र का क्या नाम लिया जाए। हमने उनको सरंक्षक बनाया है। वे हमेशा मागदर्शक रहेंगे। हो सकता है उम्र की वजह से नेता जी बहुत ज्यादा दौरे न कर पाएं। नेता जी ने खुद कहा है कि उनका गठबंधन को समर्थन है। सपा की सरकार फिर बनेगी।
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-भाजपा के मागदर्शक मंडल की तरह नेता जी को भी मागदर्शक बना दिया गया है
ये मागदर्शन मंडल नहीं है। वह हमारे सरंक्षक है। हम सबने उनको कहा भी था कि नेता जी चुनाव प्रचार के लिए चलिए। उन्होंने कहा भी था कि जरूर जाएंगे। मेरा ख्याल है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के चुनाव में नेता जी बाहर निकलेंगे। जरूर प्रचार करेंगे।
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'कांग्रेस को तय करना है कि उसके कौन से स्टार प्रचार होंगे'

- फोटो : amar ujala
- मगर सपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आपस में पट नहीं रही है
यह स्वाभाविक है। गठबंधन होता है, बहुत सी सीटें आशा के विपरीत दूसरी पार्टी को चली जाती है। कार्यकर्ता जो तैयारी करता है। उसे तकलीफ होती है। कई बागी भी बनते हैं। जब भी गठबंधन हुए हैं। उसमें ऐसा हुआ है। मगर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वोटर पार्टी और नेताओं को वोट करता है।

-करीब 17 सीटों पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार आमने सामने हैं। ये कैसा गठबंधन है?
जहां पर उम्मीदवार अपना नाम वापस नहीं लेता। वहां पर दोनों में से जिस पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार होगा। उसके लिए बड़े नेता प्रचार करेंगे। जिसने बगावत की है वह खुद हैसियत में आ जाएगा। लोग उसे वोट देंगे जो अधिकृत उम्मीदवार होगा।

-प्रियंका गांधी चुनाव प्रचार नहीं कर रहीं। डिंपल-प्रियंका की संयुक्त रैली की बात थी
कांग्रेस को तय करना है कि उसके कौन से स्टार प्रचार होंगे। हम बाध्य नहीं कर सकते। हमारे साथ राहुल और अखिलेश का चुनाव प्रचार तय हुआ था। राहुल भविष्य के कांग्रेस अध्यक्ष हैं। प्रियंका जी प्रचार नहीं कर रहीं। वह नाराज हैं। यह सब गलत बातें है। डिंपल-प्रियंका के चुनाव प्रचार को लेकर कुछ तय नहीं था।

- सपा पर कानून व्यवस्था खराब करने का आरोप लगता रहा है। आपके विधायक पर युवती के बलात्कार और हत्या में नाम आया है
यह दुर्भाग्यपूर्ण है। बाकी जांच में पता चलेगा। सच क्या है। अगर सच होगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। झूठ होगा तो मामला वहीं खत्म हो जाएगा। जब महिला आयोग बना था तो यह बात उठाई गई थी कि कहीं जायज तो कहीं इसका नाजायज दुरुपयोग न किया जाए।

- चुनाव के समय सपा पर दबंगई और गुंडागर्दी का आरोप आम है। विपक्ष खुलकर बोल रहा है
मीडिया ने लिखा है कि सबसे ज्यादा दागी भाजपा से हैं। उसके बाद बसपा भी पीछे नहीं है। तो फिर समाजवादी पार्टी ही क्यों बदनाम है। यह सही विश्लेषण नहीं है। 
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