भारत समेत दुनिया के कुल 20 देशों के जो लोग चीन वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें चीन द्वारा निर्मित कोरोना का टीका लगवाना होगा। नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने एक नोटिस चस्पा कर बताया कि चीनी टीका लगवाने के साथ उक्त व्यक्ति के पास टीकाकरण का प्रमाणपत्र भी होना अनिवार्य है।
चीन के फैसले के बाद सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि भारत में चीन द्वारा निर्मित कोई भी टीका नहीं है। चीन के दूतावास ने अभी ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि भारत में चीन का टीका नहीं है तो वो कैसे लगेगा? रिपोर्ट के अनुसार 23 हजार भारतीय छात्र जिसमें अधिकतर मेडिकल के छात्र और कुछ पेशेवर लोग हैं जो चीन में काम करते हैं।
कोरोना महामारी के कारण वह लंबे समय से स्वदेश में हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से चीन ने ये फैसला लिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आवागमन को शुरू किया जा सके।
स्पूतनिक को आपात इस्तेमाल के लिए फिर देना होगा आवेदन
रूस की स्पूतनिक वैक्सीन का भारत में तीसरा परीक्षण पूरा होने के बाद जल्द आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिलने की चर्चा है, लेकिन विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इसके लिए दोबारा हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी कंपनी को प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों ने फिलहाल उन दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं जिनके जरिये कहा जा रहा है कि रूसी टीका स्पूतनिक 91 फीसदी तक असरदार मिला है। टीके को लेकर गठित भारत सरकार की विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) का मानना है कि जब तक परीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा नहीं की जाएगी तबतक किसी भी कंपनी के दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।