स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को जानकारी दी कि दिल्ली सहित कई शहरों में निजी कंपनियां होम केयर की सुविधा दे रही हैं। इसके साथ वह मरीज को ऑक्सीजन भी उपलब्ध करा रही हैं। लेकिन वह इसकी जांच नहीं कर रही हैं कि उक्त मरीज को ऑक्सीजन चाहिए या नहीं।
इनके लिए कमाई का सबसे बड़ा स्रोत होम केयर सुविधा बन चुकी है जिससे बचना बहुत जरूरी है। अधिकारियों की मानें तो करीब 80 जिलों में ऑक्सीजन की बर्बादी को लेकर बेहद सख्त निगरानी की जरूरत है नहीं तो किल्लत और भी ज्यादा हो सकती है।
राज्यों को मिल रही 7500 लीटर
आंकड़ों के अनुसार देश में इस समय 9 हजार ली. ऑक्सीजन का हर दिन उत्पादन हो रहा है जिनमें से केवल 7500 ली. ऑक्सीजन राज्यों को आपूर्ति हो रही है। कम से कम एक दिन में 700 से 800 लीटर ऑक्सीजन बर्बाद होने का अनुमान है। देश के करीब 200 से ज्यादा जिलों में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा खपत हो रही है।
नाइट्रोजन के सिलिंडर से बचकर रहना जरूरी
दिल्ली के एसडीएम डॉ. नितिन शाक्य ने कहा, कोरोना संक्रमित मरीजों को घर पर ऑक्सीजन देने के लिए लोग कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन या दूसरी गैस का सिलिंडर ब्लैक में खरीद रहे हैं। कालाबाजारी के चलते लोग दूसरी गैस के सिलिंडर को पेंट करके ऑक्सीजन नहीं भरवाएं।
लोगों को करना होगा जागरूक
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि ऑक्सीजन की बर्बादी भी काफी हो रही है। इसे रोकने के लिए लोगों को जागूरक करने होगा। इसके अलावा राज्यों को सलाह दी है कि होम केयर की सुविधा देने वालों पर तत्काल निगरानी बढ़ाई जाए।
रिफिलिंग पर ध्यान जरूरी, जरूरत न होने पर करें बंद
एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. गुलेरिया का कहना है कि ऑक्सीजन की कोई कीमत नहीं है। देश में जिस तरह से मांग बढ़ रही है उतनी क्षमता को आप भविष्य रहते हमें सतर्क होना पड़ेगा।रिफिलिंग के वक्त भी लोगों को ऑक्सीजन की बर्बादी को रोकने पर ध्यान देना चाहिए। डॉ. डॉ. गुलेरिया का कहना है कोई मरीज सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहा तो मास्क हटाना है तो तुरंत सिलिंडर बंद कर दें।