आजकल के दौर में बिज़नेस मैनेजमेंट का मंत्रा जो सभी के लिए महत्वपूर्ण हो गया है वो है आंकडें यानि कि डाटा। बेहतरीन और फायदेमंद नतीजों के लिए इन आंकड़ों का प्रयोग बिज़नेस मैनेजमेंट के लिए अनिवार्य हिस्सा बन गया है। सही और प्रमाणित आंकड़ों ने बिज़नेस से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी कई क्रान्तिकारी परिवर्तन किए हैं जैसे मार्केटिंग, रिस्क मैनेजमेंट, फाइनेंस आदि। इसी तरह पीपल एनालिटिक्स, यानि कि एक ऐसा माध्यम जो कंपनियों को उनके कर्मचारियों के टैलेंट के बारे में सूचना देती है, बिज़नेस में मानव संसाधन के तरीकों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पहले, वर्कफोर्स प्लानिंग और उसका विश्लेषण सिर्फ इतना होता था कि कंपनी लोगों की संख्या को देखते हुए अपने बजट की योजना बना सके और औसत वेतन के आधार पर अनुमानित खर्च का आकलन कर सके। वर्कफोर्स प्लानिंग और एनालिटिक्स के आने से ज्यादा से ज्यादा कंपनियां ये समझने की कोशिश कर रही हैं कि ऐसे कौन से कारक हैं जो टॉप टैलेंट को उनकी कंपनी में काम करने के लिए आकर्षित करते हैं, कौन से कारक हैं जो किसी कंपनी में ज्यादा समय तक टिकाए रखते हैं, जुड़ा रखते हैं, किस तरह अच्छे टैलेंट की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है और ऐसे कौन सी वजहें जो उन्हें कंपनी छोड़ने को मजबूर करती है।
वर्कफोर्स प्लानिंग और एनालिटिक्स या पीपल एनालिटिक्स के कार्य को अब आला दर्जे का काम माना जाने लगा है और माना जाने लगा है कि बेहतरीन तरक्की के लिए इसकी भूमिका अति महत्वपूर्ण है। कई बड़ी कंपनियों में जैसे गूगल, एचपी, वीज़ा आदि, ये अभी ही ज़रूरी कार्य बन चुका है। ज्यादा से ज्यादा कंपनियां अब इसके जरिए ये जानने की कोशिश कर रही हैं कि लोगों से संबंधित आंकड़ों को किस तरह प्रयोग किया जाए कि कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो। जिस तरह मार्केटिंग एनालिटिक्स को मार्केटिंग के कार्य में पूरी तरह से समायोजित होने के लिए कुछ समय लगा था उसी तरह हो सकता है कि एचआर एनालिटिक्स को एचआर से संबंधित सभी कार्यों में से एक ज़रूरी कार्य बनने में कुछ सालों का समय लगे पर इसका उपयोग सभी जगहों पर धीरे धीरे बढ़ने लगा है। कई कंपनियां अपने संगठन में इसका उपयोग करने लगी हैं और इस तरह के काम को करने के लिए लोगों को नौकरियां भी ऑफर करने लगी हैं। एचआर से जुड़े प्रोफेशनल्स सामान्य तौर पर डाटा के आधार पर लोगों को रखने का काम करते रहे हैं और उनका फोकस कर्मचारियों को मैनेज करना और उनकी निजी जानकारियों का ट्रैक रखने पर रहा है।
पर एनालिटिक्स के सही प्रयोग के लिए कि उससे कंपनी में सही मायनों में बदलाव हो, एचआर मैनेजर्स को डाटा विश्लेषक बनना होगा। उनको इस काबिल होना चाहिए कि एच एनालिटिक्स के काम से मिल रहे डाटा को इस तरह उपयोग में लाएं कि कंपनी में सकारात्मक बदलाव हो। यानि आंकड़ों के आधार पर उन्हें एक कहानी निकालना आना चाहिए जो कि पूरी तरह से विश्लेषण पर आधारित और वस्तुनिष्ठ हो। ऐसे कई उदाहरण हैं जो ये बताते हैं कि अगर आंकड़ों को सही तरह से समझकर प्रयोग में लाया जाए तो सही बदलावों को दिशा मिलती है (गूगल पहले अपने यहां भर्ती करते समय कॉलेज के आंकड़ों को ध्यान में रखती थी,जिसे तब बदल दिया गया जब एनालिटिक्स से यह निष्कर्ष निकला कि कॉलेज में किए गए प्रदर्शन से इस बात की कोई प्रमाणिकता नहीं है कि वो कर्मचारी गूगल में भी सफल ही होगा)।
पीपल एनालिटिक्स पारंपरिक तौर पर सिर्फ एचआर कार्य नहीं है
डेमो पिक
पीपल एनालिटिक्स पारंपरिक तौर पर सिर्फ एचआर कार्य नहीं है और इसीलिए इस कार्य को करने के लिए जिस तरह की कुशलता की ज़रूरत होती है वो आसानी से मिलते नहीं है क्योंकि प्रभावकारी पीपल एनालिटिक्स का कार्य कई अन्य क्षेत्रों से भी जुड़ा हुआ है। पीपल एनालिटिक्स की एक सफल टीम के लिए डाटा वैज्ञानिकों, प्रोसेस पीपल, एनालिटिक्स एक्सपर्ट्स, कंसलटेंटे्स, ओडी एक्सपर्ट्स, साइकॉलोजिस्ट्स के साथ आईटी के लोगों की ज़रूरत होती है जिससे कि आप अलग अलग कौशल का प्रयोग कर पीपल एनालिटिक्स का कार्य सही तरीके से कर सकें। कुछ काम जैसे डाटा एनालिटिक्स, स्टैटिसटिक्स, साइकॉलजी, बिज़नेस मैनेजमेंट के काम एचआर की कुशलता के अंतर्गत ही आते हैं। कई कुशलताओं को ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान भी सीखा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, बिज़नेस मैनेजमेंट कि क्षमताओं को ग्रेजुएन में बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के द्वारा सीखा जा सकता है या बिज़नेस मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई कर भी। स्टैटिसटिक्स या डाटा एनालिटिक्स की योग्यता स्टैटिसटिक्स में एमएससी या पीएचडी कर हासिल की जा सकती है। इंडसट्रियल एंड ऑर्गेनाइज़ेशनल साइकॉलजी, जो कि कार्यस्थल पर मानव व्यवहार की वैज्ञानिक पढ़ाई है, की डिग्री दुनिया भर में कई बड़े इंस्टीट्यूट्स देते हैं। आप एचआर में एमबीए भी कर सकते हैं जो पीपल एनालिटिक्स के लिए ज़रूरी इन सभी योग्यताओं का एक मिश्रण है। एचआर में एमबीए दुनिया भर में कई बड़े कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है।
ऑनलाइन सूत्रों द्वारा अकर सकते हैं न्य कोर्स
एनालिटिक्स
इसके अतिरिक्त इन योग्यताओं को और बढ़ाने के लिए ऑनलाइन सूत्रों द्वारा अन्य कोर्स भी कर सकते हैं जो coursera, edx, statistics.com और अन्य मुफ्त ऑलाइन माध्यम कराते हैं। आज के जमाने में कई ऐसे माध्यम हैं जो पीपल एनालिटिक्स के लिए ज़रूरी योग्यताओं का विकास करने में मदद करते हैं और इनमें से किसी योग्यता में खास योग्यता हासिल कर वर्कफोर्स एनालिटिक्स में आप बेहद सफल करियर बना सकते हैं।
पर इसका मतलब ये नहीं कि इन संसाधनों के अभाव कोई कंपनी सफल पीपल एनालिटिक्स नहीं बना सकती। अधिकतर कंपनियां आज मुख्य क्षेत्रों पर फोकस कर उसके आसपास पीपल एनालिटिक्स के कार्य को विकसित कर रही हैं।
कोई भी एक छोटे स्तर पर शुरूआत कर आगे चलकर उसे बड़ा बना सकता है। आंकड़ों की रिपोर्टिंग बहुत मज़बूत हो तो ऑर्गेनाइज़ेशन को बेहतर बिज़नेस फैसले लेने में मदद मिलती है। अगर अच्छे डैशबोर्ड्स हों जिनसे सही पैमानों के आंकड़े निकाले जा सकें तो किसी भी संगठन के लिए उसकी सही उपयोगिता होती है।
दुनिया की सारी एनालिटिक्स या आंकड़ों का विश्लेषण अगर बिज़नेस के अनुरूप ना हो या उसके आधार पर कुछ कार्य ना किया जा सके तो वो किसी काम का नहीं है। किसी ऑर्गेनाइज़ेशन में किसी एनालिटिकल कार्य की सफलता तभी हो सकती है जब मैनेजमेंट में कुछ बदलने के लिए बेहद मज़बूत इच्छाशक्ति हो।