राज्यसभा में पेगासस जासूसी मामले और एक मीडिया समूह पर आयकर छापे को लेकर विपक्ष के भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बृहस्पतिवार को दो बार स्थगित करनी पड़ी। जैसे ही उच्च सदन में सत्र की शुरुआत हुई कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कई शहरों में मीडिया समूह के खिलाफ छापे का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उठाया मुद्दा, कुछ विपक्षी सदस्यों ने पेगासस जासूसी को लेकर वेल का किया घेराव
वहीं, तृणमूल कांग्रेस समेत कई अन्य सदस्य सदन के वेल में आकर केंद्र सरकार पर इस्राइली कंपनी एनएसओ की मदद से पत्रकारों, नेताओं और आलोचकों की जासूसी कराने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने पहले आदेश दिया कि दिग्विजय सिंह के बयान को ऑन रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा। नायडू ने सिंह से कहा, मैं आपको मंजूरी नहीं दे सकता। आपको मुझसे मंजूरी मांगनी चाहिए थी। कुछ भी ऑन रिकॉर्ड नहीं लिया जाएगा। वहीं, वेल के पास आकर हंगामा करने वाले सदस्यों से नायडू ने कहा, ऐसा लगता है कि आप सभी जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के इच्छुक नहीं हैं। कृपया वापस जाएं और अपनी सीटों पर बैठें। संसदीय मर्यादाओं का पालन करें।
मुझे नोटिस दें, तब मैं मेरिट के आधार पर आपको अनुमति दूंगा। आप लोगों का यह तरीका ठीक नहीं है। इतना समझाने के बाद भी विपक्षी सदस्यों ने विरोध करना जारी रखा। जब सदस्य नहीं माने तो सभापति ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
दोपहर 12 बजे जब फिर से सत्र शुरू हुआ तो विपक्षी दल फिर से हंगामा करने लगे। इस पर सदन के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया। सदस्यों के प्रदर्शन जारी रहने के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।