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Patra Chawl Scam: 'प्रथमेश डेवलपर्स' और एक अन्य आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में समन, संजय राउत भी हैं आरोपी

Mon, 22 Sep 2025 11:15 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई की विशेष अदालत ने पात्रा चॉल घोटाले में 'प्रथमेश डेवेलपर्स' के प्रवीन राऊत व जितेंद्र मेहता को मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी मानते हुए समन जारी किया। ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि अपराध से जुड़ी रकम से संपत्ति खरीदी गई। ध्यान रहे कि इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत भी आरोपी हैं।

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कोर्ट का फैसला - फोटो : FreePik
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विस्तार
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मुंबई की एक विशेष अदालत ने पात्रा चॉल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कंपनी 'प्रथमेश डेवलपर्स' और इसके साझेदार व्यापारी प्रवीन राऊत, साथ ही एक अन्य आरोपी जितेंद्र मेहता (मेहता डेवेलपर्स) को समन भेजा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया है कि ये दोनों आरोपी अपराध से जुड़ी रकम को इधर-उधर करने और उससे संपत्ति खरीदने में शामिल थे। इस मामले में शिवसेना (उद्धव गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत भी आरोपी हैं। इसी कारण से सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत में यह मामला चल रहा है।

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मामले में सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवांदर ने 20 सितंबर को दिए अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध प्राथमिक रूप से बनता है। अदालत ने प्रवीन राऊत की कंपनी 'प्रथमेश डेवलपर्स' और जितेंद्र मेहता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट (अतिरिक्त आरोपपत्र) पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किए हैं।

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अब समझिए क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यह पूरा मामला मुंबई के गोरेगांव इलाके में मौजूद पात्रा चॉल के पुनर्विकास से जुड़ा है। पात्रा चॉल में करीब 672 किरायेदार परिवार रहते थे और महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए) ने इसका पुनर्विकास साल 2008 में गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्रा.लि. (जीएसीपीएल) को सौंपा था। जीएसीपीएल को किरायेदारों के लिए मकान बनाने थे। जीएसपीएल हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) की सहयोगी कंपनी थी  और एमएचएडीए को भी कुछ फ्लैट देने थे। बाकी जमीन उसे प्राइवेट बिल्डरों को बेचने की अनुमति थी।

क्या है ईडी का आरोप?
मामले में ईडी का आरोप है कि जीएसीपीएल ने भूमि और एफएसआई (एफएसआई) को अन्य बिल्डरों को 1034 करोड़ रुपये में बेच दिया, लेकिन किरायेदारों को एक भी फ्लैट नहीं दिया गया। साथ ही, 2010 में ‘पात्रा चावड़ी में घास के मैदान’नाम की एक परियोजना शुरू की गई और 458 खरीदारों से 138 करोड़ रुपये बुकिंग के नाम पर लिए गए।

ईडी के अनुसार, साल 2010 से 2014 के बीच एचडीआईएल के प्रमोटर सारंग वधावन और प्रवीन राऊत ने एफएसआई बेचकर कुल 1039.79 करोड़ रुपये जुटाए। इस पैसे का बड़ा हिस्सा फ्लैट बनाने में न लगाकर विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
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समझिए क्या है प्रवीन राऊत की भूमिका
गौरतलब है कि मामले में ईडी का दावा है कि प्रथमेश डेवेलपर्स नाम की कंपनी के जरिये प्रवीन राऊत ने अवैध रूप से कमाए गए पैसों को जमीन-जायदाद में लगाया, यानी मनी लॉन्ड्रिंग की। इसी आधार पर अदालत ने कहा कि प्रथमेश डेवेलपर्स और जितेंद्र मेहता, दोनों ने अपराध की रकम बनाने और उसे इधर-उधर करने में भूमिका निभाई है। इसलिए उन्हें समन जारी करना जरूरी है।

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