फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाइलाज बीमारी से ग्रस्त मरीज कर सकता है इलाज से इनकार, नहीं मानी जाएगी आत्महत्या

Fri, 09 Mar 2018 09:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जिस मरीज के स्वस्थ होने की संभावना खत्म हो गई हो उसे ‘अंतहीन शारीरिक कष्ट’ से बचने के लिए इलाज से इनकार करने का अधिकार है। पांच जजों की संविधान पीठ ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु के मामले में एक ऐतिहासिक फैसले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

विज्ञापन


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के इलाज से इनकार करने के अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जो उम्र के अंतिम पड़ाव पर हो और दिमागी रूप से स्वस्थ हो उसे इलाज से इनकार करने का अधिकार है।

पीठ ने कहा कि 21वीं सदी में मेडिकल केयर के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की प्रगति के मद्देनजर जीवन रक्षक प्रणाली के सहारे किसी व्यक्ति की मौत को महीनों और कुछ मामलों में वर्षों तक टाला जा सकता है। यही पर मेडिकल ट्रीटमेंट से इनकार करने का सवाल खड़ा होता है। चीफ जस्टिस ने 192 पेज के अपने फैसले में कहा है कि ठीक न होने की स्थिति में पहुंच चुके या लंबे समय से कोमा में चल रहा मरीज हो सकता है कि जीना चाहता हो लेकिन इसके साथ ही वह किसी तरह की मेडिकल सर्जरी या दवा या किसी तरह के दूसरे इलाज से मुक्त रहना चाहता हो ताकि वह लंबे शारीरिक कष्ट से बच सके।
विज्ञापन


विदेश में किए गए कई फैसलों का जिक्र करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अमेरिकी अदालत के अनुसार वयस्क हो चुके स्वस्थ दिमाग वाले हर इनसान को यह तय करने का अधिकार है कि उसके शरीर के साथ क्या किया जाए। इलाज से इनकार करना आत्महत्या, डॉक्टर की मदद से की गई आत्महत्या या यहां तक की इच्छा मृत्यु से अलग है।

ठीक न होने की हालत में पहुंचे मरीज का इलाज से इनकार करने को न तो आत्महत्या कहा जा सकता है और न ही इच्छा मृत्यु। बहरहाल, ऐसे मरीजों के मामले में आत्महत्या और इलाज से इनकार करने का एक ही नतीजा होगा यानी उसकी मौत हो जाएगी। इसके बावजूद इलाज से इनकार करना आत्महत्या नहीं है।

आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अपनी पहल से अपनी जान लेता है जबकि इलाज से इनकार करने में खुद की मौत की चाहत निहित नहीं है बल्कि इसके जरिए वह मरीज अवांछित मेडिकल ट्रीटमेंट से खुद को बचाना चाहता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें