इस बीच 2015 में हार्दिक पटेल का पाटीदारों के सबसे बड़े नेता के रूप में उदय हुआ। दरअसल, 2015 में हार्दिक पटेल की बहन मोनिका राज्य सरकार की छात्रवृति पाने में असफल रही थी। इसी कारण हार्दिक पटेल ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति का गठन किया, जिसका लक्ष्य अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल होना था। बता दें कि पाटीदार समुदाय ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण चाहते हैं।
हार्दिक पटेल ने इस दौरान पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग तेज कर दी और 6 जुलाई को मेहसाणा में सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। लेकिन धीरे-धीरे ये आंदोलन हिंसक हो गया और इसने दंगे का रूप ले लिया। पूरे राज्य में हुए इस भीषण दंगे में 9 लोग मारे गए थे।
हालांकि बाद में गुजरात सरकार ने आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत 6 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले पाटीदारों, ब्राह्मणों और बनिया समुदाय के लोगों को आरक्षण मिलना था। लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार की इस अधिसूचना को रद्द कर दिया था। दरअसल, कोर्ट का कहना था कि सरकार की इस अधिसूचना से आरक्षण 50 फीसदी से ऊपर चला जाएगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी भी राज्य सरकार द्वारा 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता।