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'एमएसएमई ग्लोबल ग्रोथ का रास्ता': राजनाथ सिंह बोले- 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड’ हो मैन्युफैक्चरिंग का आधार

Tue, 01 Sep 2026 09:38 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग विज़न को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई को वैश्विक व्यापार के नए अवसरों का लाभ उठाने और खुद को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों के रूप में स्थापित करने का आग्रह किया।
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय एमएसएमई को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के मंत्र के साथ वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने आर एंड डी, तकनीकी उन्नयन और बड़े उद्योगों व शोध संस्थानों के साथ साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि बदलती वैश्विक सप्लाई चेन भारतीय एमएसएमई के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। ड्रोन, एआई, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी उन्होंने एमएसएमई के लिए व्यापक संभावनाएं बताईं।

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रिसर्च और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने पर जोर
ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक एमएसएमई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) से अपने कारोबार के एक हिस्से को अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा तकनीकी उन्नयन में निवेश करने को कहा। उन्होंने अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, IIT, अनुसंधान संस्थानों, DRDO की प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

‘विकसित भारत@2047’ में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ का विज़न ऐसे भारत की परिकल्पना करता है, जो मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में अग्रणी हो तथा रणनीतिक और आर्थिक क्षमताओं के मामले में आत्मनिर्भर हो। इसके साथ ही देश के युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर भी पैदा हों।
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बदलती सप्लाई चेन से एमएसएमई को बड़ा अवसर
बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर की बढ़ती मांग का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये बदलाव भारतीय एमएसएमई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का बड़ा अवसर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के जरिए व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

FTA से खुलेंगे वैश्विक व्यापार के नए रास्ते
उन्होंने कहा कि ये FTA नेटवर्क एमएसएमई और उद्योगों के लिए वैश्विक व्यापार और निर्यात के अवसरों का एक विशाल भंडार खोलते हैं। उन्हें क्रेडिट गारंटी के विस्तार और GST के युक्तिकरण जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और व्यापार समझौतों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और भारतीय उत्पादों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए।”

पांच साल में तेजी से बढ़ी एमएसएमई की संख्या
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में एमएसएमई की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में करीब 8 करोड़ हो गई है। उन्होंने इसे देश में तेजी से विकसित हो रहे उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण बताया।

ड्रोन से क्वांटम टेक्नोलॉजी तक बड़े अवसर
उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड मटीरियल, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों को एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण अवसरों वाला क्षेत्र बताया।

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गुणवत्ता और भरोसे से बनेगी वैश्विक पहचान
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय एमएसएमई को गुणवत्ता और भरोसे के दम पर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनानी चाहिए। डिफेंस सेक्टर में इन खूबियों का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि वहां हर पुर्जे की विश्वसनीयता सीधे तौर पर रक्षा बलों की परिचालन क्षमता पर असर डालती है।

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