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रेप पर दिए गए वो फैसले कौन से हैं जिसने न्यायपालिका पर विश्वास कायम रखा, जानिए

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रेप का विरोध,नजीर बने मामले - फोटो : social media
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12 साल से अधिक समय तक चले रेप के मामले में बाबा गुरमीत राम रहीम को आखिरकार दो अलग- अलग मामलों में कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। बाबा को मिली सजा के बाद एकबार फिर देशवासियों  का कानून व्य़वस्था में  विश्वास बना है। लंबे समय से अटके मामलों में भी न्याय मिलेगा इसका विश्वास भी बढ़ा है। राम रहीम के बहाने हमने उन मामलों पर नजर डाली जिन मामलों पर आए फैसले में देश में नजीर पेश की
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गीता चोपड़ा की वीरता को आज भी याद किया जाता है

1978 में दिल्ली में गीता चोपड़ा के साथ घटी रेप की इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। गीता और संजय का अपहरण फिरौती के लिए किया गया था। लेकिन दोनों भाई बहनों ने मुंबई जेल से रिहा हुए जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला और कुलजीत सिंह उर्फ रंगा को बराबर की टक्कर दी और वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस पूरे मामले में विभत्स ये था कि गीता चोपड़ा के साथ दोनों ने बलात्कार किया था। बलात्कार के कुछ महीनों बाद जब वे दोनों ट्रेन से भागने की कोशिश कर रहे थे तब उन्हें गिरफ्तार किया गया और चार साल के अंदर ही दोनों को हीनियस क्राइम के जुर्म में फांसी से लटका दिया गया।
गीता और संजय की वीरता को देश आज भी सलाम करता है। 26 जनवरी को देशभर के उन बच्चों को जिन्होंने वीरता का काम किया है इन दोनों भाई बहन के नाम से पुरस्कृत किया जाता है।
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मथुरा रेप मामला जिसने रेप की दी जाने वाली परिभाषा को बदला कहा -प्रस्तुत करने का मतलब सहमति नहीं है।"
ये मामला भी 1978 का ही है जब मथुरा नाबालिग दलित लड़की के साथ पुलिस परिसर थाने में दो कांस्टेबलों ने बलात्कार किया था। मामला सत्र न्यायालय में चल रहा था लेकिन न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी नहीं पाया और तर्क दिया की थाने में हुआ यौन कृत्य सहमति से हुआ है। मथुरा को इस मामले में भले ही न्याय नहीं मिला लेकिन देशभर में इस फैसले खिलाफ महिलाएं सड़क पर उतरीं और आंदोलन चलाया। इस आंदोलन ने भारत में बलात्कार कानूनों  में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए जिसमें प्रमुख ये था कि “प्रस्तुत करने का मतलब सहमति नहीं है।“  

रेप का विरोध,नजीर बने मामले - फोटो : social media
प्रियदर्शनी मट्टू का मामला लंबा चला और इंसाफ मिला

प्रियदर्शनी मट्टू को उसके साथ ही पढ़ने वाले एक साथी संतोष कुमार सिंह ने मारा था। प्रियदर्शनी लंबे समय से उसके खिलाफ पुलिस में हरासमेंट, घूरने सहित कई मामले में शिकायत दर्ज करा चुकी थी लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत पर गौर नहीं किया। आखिरकार संतोष ने प्रियदर्शनी के साथ बलात्कार किया और वो अपने ही घर में ही मरी पाई गई।

प्रियदर्शनी को इंसाफ मिलने में दस साल लग गया। प्रियदर्शनी को इंसाफ दिलाने के लिए महिला संगठनों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और इस मामले में हाई कोर्ट ने सुओ-मोटो लिया। और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा गया। 30 अक्टूबर 2006 को दो जजों की बेंच ने आरोपी को हैंग टिल डेथ की सजा सुनाई जिसे बाद में आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर 2010 में लाइफ टाइम की सजा में बदलवाया।

हेतल पारेख मामले में ोमर्सी पेटीशन को अब्दुल कलाम ने खारिज किया

बात 1990 की है। हेतल अपने माता-पिता और भाई के साथ कोलकाता में रहती थी। वो जिस सोसाइटी में रहती थी उसी सोसाइटी के गार्ड धंनजय चैटर्जी ने एक दिन हेतल को अकेला पाकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसकी जान ले ली।
इस घटना के बाद वो अपने गांव भाग गया था। कोर्ट ने उसे हैंग टिल डेथ की सजा सुनाई थी जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने उसकी मर्सी पेटीशन को खारिज कर दिया था।
 
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सौम्या का मामले में आरोपी को मिली उम्र कैद
सौम्या एक दिन ट्रेन से ट्रेवल कर रही थी। केरल में इर्नाकुलम से शॉरनुर जा रही थी। ये 2011 फरवरी की बात है। कुछ ही मिनट बाद जब ट्रे वालाथल नगर स्टेशन पहुंची आरोपी गोविंदचामी ने पहले उसे लूटने की कोशिश की, उसके सिर को दीवार पर मारा और ट्रेन से फेंक दिया। फिर उसने रेलवे ट्रैक के पास ले जाकर उसके साथ रेप किया। उसे बहुत सारी चोटें आई थीं। सौम्या की मौत हो गई थी। लेकिन सौम्या की लड़ाई लड़ी जाती रही और आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई।
 
 निर्भया मामले में देश एकजुट हुआ और जुवेनाइल एक्ट में हुआ बदलाव

16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली नहीं देश कभी नहीं भूलेगा। ऐसी काली रात जिसने दरिंदगी की हर हदें पार कर दी। क्या दिल्ली, क्या महाराष्ट्र, क्या केरल और क्या कश्मीर पूरा देश सड़क पर रहा 15 दिनों तक। संसद हिलती रही। निर्भया और उसका दोस्त रात के महज साढ़े नौ बजे फिल्म देखकर वापस जा रहे थे।

दोनो जिस बस में चढ़े उसमें पहले से छह लोग सवार थे। जिन्होंने दिल्ली के सबसे सेफ माने जाने वाले दक्षिणी दिल्ली इलाके में सड़क पर बस के अंदर दरिंदगी करते रहे और वो लड़ती रही। दरिंदे उसे नग्न अवस्था में सड़क पर फेंक कर चले गए। निर्भया के साथ घटी दरिंदगी ने पूरे देश को सड़क पर ला दिया। लोग इंसाफ मांगते रहे।

इस मामले के बाद ही जुवेनाइल एक्ट में संशोधन किया गया और हीनियस क्राइम जैसे हत्या, बलात्कार और एसिड से हमले जैसे क्रूर अपराधों के लिए नाबालिगों को बालिगों जैसी सजा मिलेगा। पहले ये अंतर 18 साल से शुरू होता था जो अब 16 साल कर दिया गया है।
इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। रामसिंह ने तिहाड़ जेल में खुद को फांसी लगाई वहीं जुवेनाइल को तीन साल की सजा के बाद छोड़ दिया गया और चार को मौत की सजा सुनाई गई है। 

एसिड अटैक मामले में लक्ष्मी सा की लड़ाई को नहीं भूला जा सकता है। जिसने लंबी लड़ाई के बाद देश भर में एसिड की बिक्री पर लगाम लगवाई तथा एसिड पीड़ितों के इलाज के लिए सरकारी फंड तक बनवाया।
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