पश्चिम एशिया में व्याप्त संकट के बीच कांग्रेस के कई नेता सरकार के पक्ष में बोलते दिख रहे हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई है। दरअसल, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सरकार के इस मुद्दे पर घेर रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं के बयान से पार्टी को कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और मनीष तिवारी ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।
नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी
इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।
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आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।
एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।