असम और केरल में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में बयानयुद्ध का सिलसिला थम नहीं रहा है। पार्टी में बदलाव की बात कई कोनों से उठने लगी है लेकिन कोई नेता सोनिया परिवार पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। पांच राज्यों के चुनावों ने पार्टी के खिसकते जनाधार को रेखांकित किया। अब कांग्रेस के पास कर्नाटक के अलावा कोई बड़ा राज्य नहीं रह गया है।
कांग्रेस नेता ने असम चुनाव के बाद पार्टी में सर्जरी का मामला उठाए जाने पर कहा है कि सोनिया गांधी पार्टी की सक्षम नेता हैं। पार्टी नेतृत्व में बदलाव की कोई जरुरत नहीं है। एक जमाने में कमलनाथ ही राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने का मुद्दा उठाते रहे हैं। एक पार्टी में दो बास का मुद्दा भी कांग्रेसी दबी जुबान से उठाते रहे हैं। उधर सर्जरी का मुद्दा उठाने वाले दिग्विजय सिंह अब खुलकर युवा हाथों में कमान सौंपने की बात करने लगे हैं।
इससे पहले शशि थरुर ने भी युवा नेतृत्व की जरुरत पर जोर दिया था। दिग्विजय की तरह पार्टी का एक धड़ा मानता है कि उपाध्यक्ष के रूप में राहुल खुलकर फैसले नहीं ले पा रहे हैं। पुराने कांग्रेसी राहुल को अपनी टीम बनाने का अवसर नहीं दे रहे । लिहाजा अब राहुल को अपने तरीके से पार्टी को आगे बढ़ाने का मौका देना चाहिए। उदर तीसरा धड़ा प्रियंका गांधी के नेतृत्व में ही कांग्रेस का भविष्य देखता है।