राजधानी दिल्ली की राजनीतिक गलियारे में मंगलवार को एक अहम बैठक हुई है। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस प्रमुख गुलाम नबी अहमद मीर, कांग्रेस इन-चार्ज रजनी पाटिल, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल व पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल थे।
इन नेताओं की बीच हुई यह मुलाकात अहम मानी जा रही है क्योंकि अभी हाल ही में एक रैली के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी, जिसके बाद से कांग्रेस समर्थक उनके खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन पर उतर आए हैं।
बता दें अभी हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर उन्हें जमीन से जुड़ा हुआ व्यक्ति बताया था। उन्होंने कहा था कि लोगों को प्रधानमंत्री से सीखना चाहिए कि कामयाबी की बुलंदियों पर जाकर भी कैसे अपनी जड़ों को याद रखा जाता है। उन्होंने पीएम मोदी के बचपन में चाय बेचने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी असलियत नहीं छिपाई।
इधर राज्यसभा में आजाद को विदाई देते हुए अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनकी तारीफ की थी और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहने के दौरान हुई एक आतंकी घटना का जिक्र कर भावुक भी हो गए थे। उन्होंने आजाद को सैल्यूट किया था।
गुलाम नबी आजाद द्वारा प्रधानमंत्री की तारीफ किए जाने के बाद से कई कांग्रेसी नेताओं ने उन पर निशाना साधाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद आजाद इन दिनों जम्मू कश्मीर के दौरे पर हैं। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन पर अपने निजी हितों की खातिर पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा के इशारे पर कांग्रेस के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।
कांग्रेस के कुछ युवा कार्यकर्ताओं ने आजाद को पार्टी से निकाले जाने की मांग भी कर डाली। जिला विकास परिषद (डीडीसी) के सदस्य एवं जम्मू कश्मीर कांग्रेस के पूर्व महासचिव मोहम्मद शाहनवाज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहां प्रेस क्लब के बाहर आजाद का पुतला फूंका व उनके खिलाफ नारे लगाए।
कार्यकर्ताओं ने कहा, 'कांग्रेस ने उन्हें ऊंचा दर्जा दिया लेकिन आज जब पार्टी को सहयोग की जरूर है तो वह भाजपा से दोस्ती बढ़ा रहे हैं। वह यहां डीडीसी चुनाव प्रचार के वक्त नहीं आए, लेकिन अब यहां आकर प्रधानमंत्री की तारीफ कर रहे हैं।'
बता दें हाल ही में गुलाम नबी आजाद का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें सम्मानित करने के लिए कुछ जी-23 नेताओं ने एक रैली को संबोधित किया था। ऐसा माना जा रहा है कि यह पार्टी नेतृत्व को संदेश देने के लिए अपनी ताकत दिखाने का तरीका था।
कांगेस के 23 नेताओं ने पिछले साल अगस्त में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को पत्र लिखा था और पार्टी में संगठनात्मक बदलाव करने के साथ ही पूर्णकालिक पार्टी अध्यक्ष की मांग की थी। तभी से इन नेताओं के समूह को जी-23 भी कहा जाता है।