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आंशिक लॉकडाउन: मुंबई में लोकल ट्रेनों व बेस्ट बसों में घटे यात्री, ज्वेलरी, पर्यटन समेत तमाम कारोबार पर बुरा असर

Fri, 09 Apr 2021 04:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मुंबई की लोकल ट्रेनों में करीब सात लाख यात्री घटे
  • बसों व बाजारों में कारोबार का भी बुरा हाल
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मुंबई की लोकल ट्रेन - फोटो : पीटीआई
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देश में शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर और मुंबई समेत महाराष्ट्र व देश के अन्य हिस्सों में लागू किए गए आंशिक लॉकडाउन का असर कामधंधों पर नजर आने लगा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में तो लोकल ट्रेनों व बेस्ट बसों में एक पुन: यात्री घट गए हैं। ज्वेलरी, पर्यटन, कपड़ा समेत तमाम उद्योग-कारोबार अभी पहले लॉकडाउन से हुए घाटे से उबरे भी  नहीं थे, एक बार वापस पुराने पैदा हो गए हैं। 
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मुंबई में मध्य व पश्चिम रेलवे के उपनगरीय रेल नेटवर्क पर आंशिक लॉकडाउन का असर यह हुआ कि उसके 7 लाख यात्री कम हो गए हैं। मध्य रेलवे के नेटवर्क से पहले जहां रोज 22 लाख यात्री सफर करते थे वहीं, अब यह संख्या 19 लाख रह गई है। इसी तरह पश्चिम रेलवे के नेटवर्क से पहले रोज 18 लाख यात्री सफर करते थे, जो अब घटकर 14 लाख रह गए हैं। 

बता दें, इस सप्ताह के आरंभ में महाराष्ट्र सरकार ने इस सप्ताह आंशिक लॉकडाउन लागू किया है। इसके बाद लोकल ट्रेनों व बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यानी बेस्ट की बसों में लोगों की आवाजाही एकदम कम हो गई है। इसके अलावा बसों, रिक्शा, टैक्सी व विमानों को भी उनकी कुल यात्री क्षमता की 50 फीसदी सवारियां ही ले जाने की इजाजत है, इसलिए भी आवाजाही घट गई है। 
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नाइट कर्फ्यू, सप्ताहांत लॉकडाउन से धंधों पर असर
देश में नए सिरे से लगाई गईं कोविड-19 पाबंदियों के कारण देश के धंधों व रोजगार पर पुन: बुरा असर पड़ने लगा है। ज्वेलरी, कपड़ा, होटल व पर्यटन कारोबार पहले लॉकडाउन में लगभग चौपट हो गया था, अनलॉक के बाद यह उबरने की कोशिश कर ही रहा था कि एक बार वापस आंशिक लॉकडाउन ने उनकी कमर तोड़ दी है। 

कोरोना की दूसरी लहर ने पिछले साल 2020 में महामारी के भयावह रूप की यादें ताजा कर दी हैं। मरीजों के रोज मिल रहे चौंकाने वाले आंकड़े लॉकडाउन का खतरा दिखा रहे हैं। हालांकि इस बार सरकार सतर्ककता पूर्वक कदम उठा रही है, लेकिन नाइट कर्फ्यू, सप्ताहांत लॉकडाउन, शादी व अन्य कार्यक्रमों में सीमित संख्या में लोगों के शरीक होने की इजाजत जैसे कदमों का भी अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है।

कोरोना की चेन तोड़ने के लिए देशभर की सरकारों व प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं। इनसे बाजारों में भीड़ कम करने के उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन भीड़ कम होने का मतलब है धंधों व रोजगार की कमर टूटना। इसका असर नजर आने लगा है। मप्र, उप्र, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब समेत कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू व सप्ताहांत लॉकडाउन जैसे कदम उठाए गए हैं। इनका आर्थिक कारोबार पर बहुत असर पड़ रहा है। 
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