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Drone: 'सीमाओं की सुरक्षा के लिए बढ़ाएं ड्रोन, खरीद प्रणाली भी सुधरे', संसदीय समिति ने की सिफारिश; वजह भी बताई

Wed, 18 Mar 2026 12:51 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समिति ने यह भी सिफारिश की कि हथियार, संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और सुरक्षा संसाधनों के आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त पूंजीगत बजट सुनिश्चित किया जाए, जिससे विभिन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बलों की तैयारी बेहतर हो सके।
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ड्रोन (सांकेतिक) - फोटो : AI
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विस्तार
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सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के मुद्दे पर संसदीय समिति ने मंगलवार को चर्चा की। इसके बाद संसदीय समिति ने सीमा सुरक्षा बलों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद को प्राथमिकता देने और इसे तेजी से पूरा करने की सिफारिश की है। समिति ने खास तौर पर स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और प्रभावी कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया है।
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भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी अनुदान मांगों से जुड़ी रिपोर्ट में कहा कि निगरानी, तस्करी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन प्रणालियों की खरीद और तैनाती को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, विशेषकर सीमा सुरक्षा बलों में।

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स्वदेशी तकनीक को मिले प्रोत्साहन
समिति ने यह भी कहा कि स्वदेशी तकनीकी समाधान को प्रोत्साहित किया जाए और रियल टाइम निगरानी, खुफिया जानकारी साझा करने और त्वरित कार्रवाई के लिए एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल तंत्र विकसित किया जाए। इसके साथ ही ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के संचालन और उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए बनाई गई मॉडर्नाइजेशन प्लान-फोर योजना का उद्देश्य मौजूदा उपकरणों और आधुनिक जरूरतों के बीच की तकनीकी खाई को पाटना है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं और टेंडर प्रक्रियाओं के कारण खरीद में देरी हो रही है। 

खरीद प्रणाली में लाया जाए सुधार
समिति ने सुझाव दिया कि बेहतर तकनीकी जांच, अग्रिम योजना और डिलीवरी की निगरानी के साथ एक सुव्यवस्थित खरीद प्रणाली विकसित की जाए, ताकि अंतिम समय की जल्दबाजी और वित्तीय बोझ से बचा जा सके। 

इसके अलावा समिति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए आवास की कमी पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकृत 2,68,346 आवासों के मुकाबले वर्तमान में केवल 1,35,544 आवास उपलब्ध हैं। 10,430 आवास निर्माणाधीन हैं, जिनके पूरा होने के बाद भी स्थिति में सीमित सुधार ही होगा। 
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वर्तमान में आवास संतुष्टि स्तर 50.14 प्रतिशत है, जो निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 54.03 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। समिति ने आवास निर्माण को समयबद्ध तरीके से बढ़ाने और कठिन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।

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