देश में एक साथ चुनाव कराने की वकालत करते हुए संसद की एक समिति ने मंगलवार को कहा, एक साथ चुनाव होने से बार-बार चुनावों को लेकर मतदाता में पैदा हुई उदासीनता को कम किया जा सकेगा और आम जनता, खासतौर पर मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
विधि एवं न्याय और कार्मिक मंत्रालयों पर बनी संसद की स्थायी समिति ने विधि मंत्रालय के लिए अनुदान की मांगों पर अपनी रिपोर्ट में कहा, एक साथ चुनाव से सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा और राजनीतिक दलों का खर्च कम होगा व मानव संसाधन का अधिकतम इस्तेमाल किया जा सकेगा। मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में समिति की यह रिपोर्ट पेश की गई।
समिति ने कहा, एक देश, एक चुनाव या एक साथ सभी चुनाव कराने का विचार देश के लिए नया नहीं है, क्योंकि 1952, 1957 और 1962 में पहले के तीन लोकसभा चुनाव के समय चुनाव एक साथ ही हुए थे।
इसके मद्देनजर एक साथ चुनाव कराने के लिहाज से स्थानीय निकायों, विधानसभाओं और लोकसभा के लिए निश्चित कार्यकाल के लिए संविधान के कुछ प्रावधानों को संशोधित किया जा सकता है।