एक संसदीय पैनल ने सिफारिश की है कि चीन की बढ़ती पहुंच और पड़ोसी देशों में उसकी मौजूदगी को देखते हुए भारत को अपनी विकासात्मक कूटनीति की समीक्षा करने और उसे बढ़ाने की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति द्वारा हाल ही में संसद में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट वर्ष 2022-23 के लिए विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगों के विषय पर पैनल के अवलोकन को लेकर थी।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि हमारे विकासात्मक गठजोड़ का विस्तार करने के लिए रणनीति या दृष्टिकोण तैयार करने की जरूरत है जिसमें खासतौर पर क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने पर जोर दिया जाना चाहिए । इससे हमारे पड़ोस में अन्य क्षेत्रीय ताकतों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि भारत सरकार पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और पड़ोस पहले नीति में इस नीति का खासतौर पर उल्लेख है।
अफगानिस्तान के साथ भारत की विकास साझेदारी में इसके 34 प्रांतों और विभिन्न क्षेत्रों में 500 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा है कि इस संबंध में कई प्रस्ताव पहले से ही प्रक्रियाधीन हैं। अफगानिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति के कारण, परियोजनाओं के क्रियान्वयन को झटका लगा है।
म्यांमार को आवंटन पर संसदीय समिति की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक हालात के बावजूद भारत ने इस साल मार्च में सूचना प्रौद्योगिकी और कृषि अनुसंधान प्रत्येक पर क्षमता निर्माण संस्थान के कार्य को पूरा किया और सौंप दिया है।
‘कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ के बारे में मंत्रालय ने कहा कि इसका जलमार्ग वाला काम पूरा हो गया है। जबकि इसके तहत सड़क संबंधी निर्माण कार्य धीमा रहा है। इसमें मुख्य रूप से म्यांमा की ओर सुरक्षा स्थिति और कोविड-19 महामारी के कारण देरी हुई है। मंत्रालय ने कहा कि म्यांमार में मौजूदा सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए उपरोक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निष्पादन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।