संसद की एक समिति ने 3.15 लाख करोड़ रुपये की लंबित राजमार्ग परियोजनाओं पर नाखुशी जताते हुए सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय से कहा है कि पहले इन परियोजनाओं को पूरा करें, तभी किसी नई परियोजना का एलान करें। लंबित 888 परियोजनाओं के तहत 27,665.3 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाने हैं।
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर बनी संसद की स्थायी समिति ने संसद में पेश अपनी नई रिपोर्ट में यह भी कहा है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को लंबित सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए। 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष टीजी वेंकटेश ने कहा, सड़क परियोजनाओं में देरी के चलते समय का बहुत नुकसान होता है और सड़क का बेइंतिहा इस्तेमाल करने की वजह से ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है। साथ ही परियोजना की लागत भी बढ़ जाती है।
समिति ने कहा कि मंत्रालय को देश में नई सड़क परियोजनाओं की घोषणा करने के बजाय रुकी पड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करने और उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। समिति ने विभिन्न राज्यों में परियोजनाओं के पूरा होने में देरी को देखते हुए मंत्रालय को विलंब-समाधान तंत्र विकसित करने के लिए कहा।
एक साल में बननी थी 6,469 किमी सड़क, बनी सिर्फ ढाई हजार किमी ही
मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 6,469 किमी के लक्ष्य के मुकाबले जनवरी, 2021 तक 2,571 किमी तक ही सड़क बन पाई। समिति ने कहा, अगर यही हाल रहा तो भारतमाला परियोजना का प्रथम चरण 2025-26 तक पूरा नहीं हो सकेगा। इसके अलावा प्राधिकरण पर 97,115 करोड़ रुपये का ऋण दायित्व भी है।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लंबित परियोजनाएं
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सड़क परियोजनाएं लंबित हैं। जो परियोजनाएं लंबित हैं, उनमें प्रमुख रूप से गया-हिसुआ, राजगीर-नालंद-बिहार शरीफ का चार लेन वाली परियोजना और पटना-गया-डोभी परियोजना है, जो बोध गया में महाबोधि मंदिर को जोड़ती है। इसके अलावा गोवा से कर्नाटक, गोवा बॉर्डर से मुंबई और मुजफ्फरपुर में एनएच-77 और उत्तराखंड में कौड़ियाला सड़क परियोजनाएं भी रुकी पड़ी हैं।