जिस एलओयू यानी गारंटी पत्र का इस्तेमाल करके नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक को 14 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया था। उसी नियम को फिर से बहाल करने की सिफारिश संसदीय स्थाई समिति ने की है। घोटाला सामने आने के बाद आरबीआई ने एलओयू और एलओसी पर रोक लगा दी थी।
'स्नान के पानी के साथ बच्चे को फेंकने जैसा'
वाणिज्य मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीएनबी घोटाले के बाद एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) और एलओसी (लेटर्स ऑफ क्रेडिट) पर प्रतिबंध लगाना स्नान के पानी के साथ बच्चे को फेंकने जैसा है। स्थाई समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक से गारंटी पत्र (एलओयू) को तत्काल बहाल करने को कहा है। समिति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि उचित सुरक्षा तय करके एलओयू को दोबारा से शुरु किया जाए।
आरबीआई ने जल्दबाजी में किया फैसला
राज्य सभा के सदस्य नरेश गुजराल की अध्यक्षता में संसदीय समिति ने एलओयू को फिर से चालू करने के पीछे दलील दी है कि एलओयू न होने से व्यापारियों को नुकसान हो रहा है और इसे शुरू करके व्यापारियों को लोन देने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। समिति का कहना है कि आरबीआई ने एलओयू को बंद करने के अपने फैसले से जरूरी सलाह-मशविरा नहीं किया। समिति का मानना है कि आरबीआई, पीएनबी धोखाधड़ी से हतोत्साहित हो गया और बिना अधिक सोचे और विचारे एलओयू/एलओसी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जल्दबाजी में कर दिया।