डाटा सुरक्षा बिल पर संसद की संयुक्त समिति ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर की प्रतिबंध नीति पर भी सवाल उठाए। समिति की अध्यक्ष व भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा, ट्विटर की प्रतिबंध नीति को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। उसकी कार्रवाई बहुत व्यक्तिपरक है। ऐसा लगता है कि ट्विटर खुद कानून बन गया है और इन परिस्थितियों में वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि समिति के कुछ सदस्यों ने ट्विटर की पारदर्शिता नीति और चुनावों के दौरान उसकी कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई। इस बीच, लद्दाख को चीन का हिस्सा बताने के मामले में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, हाल ही में जियो टैगिंग की समस्या को हमारी टीम ने ठीक कर लिया है। अपने काम में हम पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध हैं। समय-समय पर भारत सरकार को अपडेट देते रहेंगे।
ट्विटर इंडिया की ओर से संसदीय समिति के समक्ष सार्वजनिक नीति की वरिष्ठ प्रबंधक शगुफ्ता कामरान, वकील आयुषी कपूर, नीति संचार अधिकारी पल्लवी गुप्ता और कॉरपोरेट सुरक्षा अधिकारी मनविंदर बाली पेश हुए।
सरकार ने दी थी चेतावनी
भारत सरकार ने 22 अक्तूबर को ट्विटर को चेताया था कि देश की संप्रभुता व अखंडता का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय साहनी ने ट्विटर सीईओ जैक डोर्सी को देश की संवेदनशीलता का सम्मान करने को कहा था।