कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र के लिए रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी ने तय किया है कि वह सत्र को बाधित नहीं करेगी। कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान चीन सीमा विवाद, न्यायपालिका और महंगाई के मसले पर केंद्र सरकार को घेरेगी। संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। यह पुराने संसद भवन में ही चलेगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस तीन मुख्य मुद्दे उठाएगी। इनमें भारत-चीन सीमा विवाद, महंगाई और देश में संवैधानिक व स्वतंत्र संस्थानों के कामकाज में हस्तक्षेप शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आज की बैठक में बेरोजगारी के मुद्दे, किसानों के लिए एमएसपी गारंटी, मूल्य वृद्धि, मुद्रास्फीति, साइबर अपराध, न्यायपालिका और केंद्र के बीच तनाव, रुपये का कमजोर होना, उत्तर भारत में कम निर्यात और वायु प्रदूषण सहित अन्य मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस जातिगत जनगणना के पक्ष में है, इसे कराना जरूरी है। EWS आरक्षण पर बातचीत हुई थी, चूंकि सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीश संशोधन पर सहमत हुए और दो ने इस पर सवाल उठाए हैं, कांग्रेस इस पर पुनर्विचार करने की मांग करेगी और संसद में बहस करना चाहेगी।
सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी समेत इसके कई नेताओं के भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के कारण संसद सत्र में भाग लेने की संभावना नहीं है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रह सकते हैं।
दरअसल, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर पार्टी के संसदीय रणनीति समूह की बैठक हुई। बैठक में रमेश के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, वरिष्ठ पार्टी नेता पी चिदंबरम, केसी वेणुगोपाल, मनीष तिवारी, के सुरेश और मणिकम टैगोर आदि शामिल हुए।