पीएम मोदी के भाषण के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
पीएम ने सदन के सामने 11 संकल्प रखे। पहला संकल्प नागरिक और सरकार अपने कर्तव्यों का पालन करे। दूसरा संकल्प हर क्षेत्र और समाज को विकास का लाभ मिले। तीसरा संकल्प भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस हो। भ्रष्टाचारी की सामाजिक स्वीकार्यता न हो। चौथा संकल्प देश के कानून, नियम और परंपरा के पालन में देश के नागरिक में गर्व का भाव हो। पांचवां संकल्प गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हो। छठवां संकल्प देश की राजनीति को परिवारवाद से मुक्ति मिले। सातवां संकल्प संविधान का सम्मान हो। राजनीतिक स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए। आठवां संकल्प आरक्षण न छीना जाए। धर्म के आधार पर आरक्षण की हर कोशिश पर रोक लगे। नौवां संकल्प वीमेन लेड डवलपमेंट में भारत दुनिया के लिए मिसाल बने। दसवां संकल्प राज्य के विकास से राष्ट्र का विकास हो। 11 वां संकल्प एक भारत श्रेष्ठ भारत का ध्येय सर्वोपरि हो। इसी संकल्प के साथ हम मिलकर आगे बढ़ते हैं तो संविधान की भावना पूरी होगी। देश जब आजादी के 100 साल मनाएगा तो विकसित भारत के साथ मनाएगा।
पीएम ने कहा कि संविधान भेदभाव की अनुमति नहीं देता है। हर लाभार्थी को हम योजना का पूरा लाभ दे रहे हैं। जिसका हक है हम उसे पूरा हक दे रहे हैं। सामाजिक न्याय को लेकर हम जी रहे हैं। पीएम ने कहा कि कुछ दलों का राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता का भाव रखने वालों से मैं कुछ पूछना चाहता हूं। देश में योग्य नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए या नहीं? क्या लोकतंत्र को परिवारवाद ने नुकसान पहुंचाया है? युवा राजनीति में आगे आएं इसके लिए हर राजनीतिक दल प्रयास करे। एक लाख नौजवानों को राजनीति में लाना है। अगर हम मौलिक कर्तव्यों का पालन करें तो कोई हमें विकसित भारत बनाने से नहीं रोक सकता।ञ
पीएम ने कहा कि बड़ी-बड़ी कथाएं सुनाने वालों ने आजादी के कई दशक के बाद भी आदिवासियों के लिए अलग मंत्रालय नहीं बनाया गया। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में यह काम किया गया। मछुआरों, सहकारिता के लिए हमने काम किया। अलग मंत्रालय बनाया। अलग कौशल मंत्रालय बनाया। ताकि युवा तैयार हों। पूर्वाेत्तर के विकास के लिए हम काम कर रहे हैं। हमने लैंड रिकॉर्ड के लिए स्वामित्व योजना बनाई। पिछले 10 वर्ष में हमने गरीब को मजबूती दी, उसमें आत्मविश्वास पैदा किया। आज 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को हराया है। मैं संविधान के तहत काम कर रहा हूं।
पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि जिनको कोई नहीं पूछता, उनको मोदी पूजता है। हमने दिव्यांगों की चिंता की। हमने दिव्यांगों के लिए कॉमन साइन भाषा बनाई। घूमंतू लोगो को बॉन्ड दिए। रेहड़ी-पटरी वालों को हमने स्वनिधि योजना से लोन दिया। विश्वकर्मा कल्याण के लिए योजना बनाई। ट्रांसजेंडर के अधिकारों के लिए हमने काम किया। आदिवासी समाज के लिए हम पीएम जनमन योजना लाए। मोदी आखिरी को भी पूजता है। देश में 60 साल में 100 बैकवर्ड जिले घोषित किए गए थे। हमने इसे बदला। हमने पांच सौ ब्लॉक को बदला है।
यहां जुमले की बहुत बातें होती हैं। इस देश का सबसे बड़ा जुमला था- गरीबी हटाओ। यह इतना बड़ा जुमला था कि गरीबी की बातें तो होती थीं, लेकिन उनके लिए कांग्रेस को एक टॉयलेट बनाने की फुरसत नहीं थी। हमने इस काम को हाथ में लिया और पूरा किया। उसका मजाक उड़ाया गया, लेकिन लोगों की गरिमा के लिए उस काम में हम डिगे नहीं। इसलिए वो काम पूरा हो रहा है। इस देश की जनता पीने के साफ पानी के लिए परेशान रही। ये काम भी हमने समर्पण भाव से आगे बढ़ाया है। हमने महिलाओं को धुएं से मुक्ति देकर सिलिंडर दिए। हम मुफ्त राशन दे रहे हैं। उसका मजाक न उड़ाएं। हम गरीबी से लोगों को बाहर ला रहे हैं। गरीब ने बैंक का दरवाजा नहीं देखा था। हमने उनके बैंक खाते खुलवाए।
2014 के बाद एनडीए ने संविधान को मजबूत किया। पुरानी बीमारियों से हमने मुक्ति का अभियान चलाया। हमने देश की एकता के लिए संविधान संशोधन किए। ओबीसी के लिए सम्मान के लिए हमने संविधान संशोधन किया। समाज के दबे, कुचले लोगों के साथ खड़े होना हमारा कर्तव्य है। हमने सामान्य जन को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया। हमने महिलाओं को शक्ति दी। हमने देश की एकता के लिए संविधान संशोधन किया। हमने डंके की चोट पर धारा 370 को हटाया। हमने सीएए लाया। हमने जो किया उस पर हमें गर्व है।
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान में लोगों के नाम ढूंढने वालों को मैं बता दूं कि कांग्रेस के अध्यक्ष सीताराम केसरी जो अति पिछड़े समाज से आते थे, उनका अपमान किया गया। उनको बाथरूम में बंद कर दिया गया। फुटपाथ पर फेंका गया। पूरी कांग्रेस पर एक परिवार ने कब्जा कर लिया। लोकतंत्र को नकार दिया। संविधान के साथ खिलवाड़ करता कांग्रेस की रगों में रहा है। हमारे लिए संविधान कर पवित्रता और शुचिता सर्वोपरि है। हमने 13 दिन सरकार चलाई। सरकारों को अस्थिर करने के लिए खेल खेले गए। सरकार बचाने के लिए वोट खरीदे गए। 90 के दशक में कई सांसदों को रिश्वत देने का पाप किया गया। कांग्रेस के लिए सत्ता सुख, सत्ता की भूख यही उसका इतिहास और वर्तमान है।
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान सभा में समान नागरिक संहिता को लेकर गहन चर्चा की गई थी। बाबा साहब आंबेडकर ने कहा था कि धार्मिक आधार पर बने पर्सनल लॉ को खत्म करने की जरूरत है। मुंशी जी ने तब कहा था कि समान नागरिक संहिता देश की एकता अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार यूसीसी लाने की बात कही है। हम इसे लागू करने के लिए पूरी ताकत से लगे हैं। कांग्रेस के लोग संविधान निर्माताओं की भावना का अनादर कर रहे हैं। उनके लिए संविधान राजनीति का हथियार है।
पीएम ने कहा कि जिन्होंने अपनी पार्टी के संविधान को स्वीकार नहीं किया है। इनकी शुरुआत ही गड़बड़ हुई है। 12 कांग्रेस की प्रदेश की कमेटियों ने सरदार पटेल के नाम पर सहमति दी थी। नेहरु जी के साथ एक भी कमेटी नहीं थी। संविधान के तहत सरदार साहब ही देश के प्रधानमंत्री बनते। लेकिन लोकतंत्र में श्रद्धा नहीं, खुद के ही संविधान को नहीं माना। इसलिए सरदार जी प्रधानमंत्री नहीं बने और ये बैठ गए। जो लोग अपनी ही पार्टी के संविधान को नहीं मानते, वे देश के संविधान को कैसे स्वीकार कर सकते हैं।
पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की लगातार अवमानना की है। संविधान के महत्व को कम किया है। संविधान के साथ धोखेबाजी की गई। 35ए संसद में आए बिना देश पर थोप दिया। 35 ए न होता तो जम्मू-कश्मीर में ऐसे हालात न होते। इस पर संसद को अंधेरे में रखा गया। उनके पेट में पाप था। बाबा साहब आंबेडकर के प्रति भी कांग्रेस में कटुता भरी थी। कांग्रेस ने आंबेडकर जी का स्मारक भी नहीं बनवाया। हमने बाबा साहब मेमोरियल बनाया। आरक्षण को धर्म के आधार पर तुष्टिकरण के नाम पर नुकसान पहुंचाया। इसका नुकसान एससी-एसटी ओबीसी को हुआ। कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने आरक्षण का विरोध किया है। इसके विरोध में लंबी-लंबी चिट्ठियां लिखी हैं। सदन में आरक्षण के खिलाफ भाषण दिए गए। कांग्रेस गई तब ओबीसी को आरक्षण मिला। कांग्रेस ने सत्ता सुख और वोट बैंक के लिए धर्म और संप्रदाय के आधार आरक्षण का खेल खेला।
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस की अगली पीढ़ी भी यही खिलवाड़ कर रही है। एक किताब में लिखा गया है कि जिसमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा है कि मुझे यह स्वीकार करना होगा कि पार्टी अध्यक्ष सत्ता का केंद्र है। सरकार पार्टी के प्रति जवाबदेह है। इतिहास में पहली बार संविधान को गहरी चोट पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री के ऊपर गैर सांविधानिक नेशनल एडवाइजरी काउंसिल बिठाया गया। उसे पीएमओ के ऊपर का दर्जा दिया गया। संविधान के तहत जनता सरकार चुनती है। अगली पीढ़ी ने क्या किया? सरकार का मुखिया कैबिनेट बनाता है। इस कैबिनेट के निर्णय को संविधान का अपमान करने वालों ने फाड़ दिया। संविधान के साथ खिलवाड़ करना और न मानना उनकी आदत हो गई है। अहंकारी व्यक्ति ने कैबिनेट के फैसले को फाड़ दिया। दुर्भाग्य देखिए एक अहंकारी व्यक्ति कैबिनेट के फैसले को फाड़ दे और कैबिनेट अपना फैसला बदल दे। ये कौन सी व्यवस्था है।
पीएम ने कहा कि आपातकाल में लोगों के अधिकार छीने गए। लोकतंत्र का गला घोंटा गया। इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाने वाले जस्टिस एचआर खन्ना को मुख्य न्यायाधीश नहीं बनने दिया गया। देश पर जुल्म और तांडव चला। एक निर्दयी सरकार संविधान को चूर-चूर करती रही। यह परंपरा नेहरू जी के बाद इंदिरा ने आगे बढ़ाई। इसके बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संविधान को एक और झटका दिया। उन्होंने सबको समानता, सबको न्याय की भावना को चोट पहुंचाई। शाहबानो को संविधान के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने न्याय दिया था, तब राजीव गांधी ने उस महिला की भावना को नकार दिया। उन्होंने वोट बैंक के लिए संविधान की भावना को बलि चढ़ाया और कट्टरपंथियों का साथ दिया। संसद में कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान संशोधन का ऐसा खून कांग्रेस के मुंह लग गया कि वह समय-समय पर संविधान का शिकार करती रही। संविधान के स्पिरिट को लहूलुहान किया। छह दशक में 75 बार संविधान बदला गया। जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री ने बोया, उसको खाद पानी एक और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया। 1971 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान बदलकर पलटा गया। उन्होंने देश की अदालत के पंख काट दिए थे। उन्होंने तब अदालत के अधिकारों को छीना था। कोई रोकने वाला था नहीं। इसलिए जब इंदिरा जी के चुनाव को अदालत ने खारिज कर दिया और उनको सांसद पद छोड़ने की नौबत आई, तो उन्होंने गुस्से में देश पर इमरजेंसी थोप दी। अपनी कुर्सी बचाने के लिए और उसके बाद 1975 में 39वां संशोधन किया और उसमें उन्होंने क्या किया- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अध्यक्ष इनके चुनाव के खिलाफ कोई कोर्ट में जा ही नहीं सकता, ऐसा नियम बनाया और इसे पीछे के लिए भी लागू कर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू जी ने उस दौरान एक चिट्ठी लिखी थी। अगर संविधान हमारे रास्ते में आ जाए तो हर हाल में संविधान में परिवर्तन करना चाहिए। जब देश में संविधान नहीं था। तब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी ने चेताया था कि यह गलत कर रहे हो। तब हमारे स्पीकर ने भी इसे गलत बताया था। आचार्य कृपलानी, जयप्रकाश नारायण जैसी बड़ी शख्सियतों ने भी इसे गलत करार दिया। लेकिन नेहरू जी का अलग संविधान चलता था। इसलिए उन्होंने इतने वरिष्ठ महानुभावों की सलाह नहीं मानी और उनकी राय को दरकिनार कर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश के लंबे इतिहास में एक ही परिवार ने राज किया है। इस परिवार के कुविचार, कुरीति, कुनीति, इसकी परंपरा निरंतर चल रही है। हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी है। 1947 टू 1952 इस देश में चुनी हुई सरकार नहीं थी। एक अस्थायी व्यवस्था, एक सेलेक्टेड सरकार थी। चुनाव नहीं हुए थे। एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर खाका खड़ा हुआ था। 1952 के पहले राज्यसभा का गठन नहीं हुआ था। जनता का कोई आदेश नहीं हुआ था। अभी अभी तो संविधान निर्माताओं ने संविधान बनाया था। तब उन्होंने ऑर्डिनेंस कर के संविधान को बदला और किया क्या- अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कर दिया गया। ये संविधान निर्माताओं का भी अपमान था। लेकिन वहां उनकी चली नहीं। बाद में जैसे ही मौका मिला, उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर हथौड़ा मार दिया। वो जो संविधान सभा में नहीं करवा पाए, वो उन्होंने पीछे के दरवाजे से किया। जो चुनी हुई सरकार के नेता नहीं थे, उन्होंने ये किया।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं तो संविधान के प्रति विशेष आदर का भाव व्यक्त करने आया। संविधान की वजह से हम यहां पहुंच पाए। संविधान के सामर्थ्य और जनता के आशीष ने हमें यहां तीसरी बार पहुंचाया है। मैं देश की जनता संविधान के साथ खड़ी रही।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि तब अटल जी की सरकार थी। जब देश संविधान का 50 वर्ष मना रहा था। तब यह मेरा भी सौभाग्य था कि मुझे संवैधानिक प्रक्रिया से मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया था। तब मैंने तय किया था मुख्यमंत्री के नाते कि हम संविधान के 60 साल मनाएंगे। हमने यह किया था। आज 75वें साल में भी मुझे संविधान दिवस मनाने का अवसर मिला। जब मैंने संविधान दिवस मनाने के लिए कहा था, तब एक नेता ने कहा था कि 26 जनवरी तो है, संविधान दिवस की क्या जरूरत। इसी सदन की बात है। अच्छा होता कि संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर लोग संविधान की चर्चा करते, लेकिन यहां कुछ और ही बात हुई।
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान के जब 25 साल थे, हमारे देश में इमरजेंसी लाई गई। नागरिकों के अधिकारों को लूट लिया गया। प्रेस की स्वतंत्रता को ताले लगा दिए गए। कांग्रेस के माथे पर ये जो पाप है न, यह धुलने वाला नहीं है। लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया था। जब 50 साल हुए तब क्या भुला दिया गया था। तब देशभर में संविधान का 50वां वर्ष मनाया गया था। अटल जी ने देश को एकता और संविधान की भावना का संदेश दिया था।
पीएम मोदी ने कहा कि देश के बुनियादी ढांचे में भेदभाव की बू आती रही है। हमने उसे मिटाया और एकता को मजबूत किया। देश के हर राज्य में बुनियादी ढांचे को सामर्थ्य देने का हमने काम किया। पीएम ने कहा कि युग बदल चुका है। भारत की तकनीक का हमने विकास किया। हम तकनीक को पंचायत तक लेकर गए हैं। हमने मातृभाषा का महत्व स्वीकारा है। हमने नई शिक्षा नीति में इसको बल दिया है। अब गरीब का बच्चा भी मातृभाषा में डॉक्टर, इंजीनियर बन सकेगा। हमने शास्त्रीय भाषाओं की दिशा में भी काम किया है। एक भारत श्रेष्ठ भारत देश की एकता को मजबूत कर रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं संविधान के प्रकाश में इन बातों को रख रहा था। पिछले 10 साल देश की जनता ने हमें जो बहुमत दिया है, उसमें हमने देश में एकता का भाव मजबूत किया है। जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 देश की एकता में रोड़ा बन रहा था। हमने अनुच्छेद 370 को हटा दिया। वन नेशन-वन टैक्स यानी जीएसटी, वन नेशन-वन राशन कार्ड हमने लागू किया। आज देश का कोई व्यक्ति अगर कहीं बीमार हो गया तो उसके पास देश में आयुष्मान कार्ड है। हमने वन नेशन-वन इलेक्ट्रिक ग्रिड के सपने को पूरा कर दिया। आज बिजली को देश के किसी भी जगह से कहीं भी दिया जा सकता है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारा संविधान भी भारत की एकता का आधार है। हमारे संविधान के निर्माण में इस देश के बड़े दिग्गज रहे हैं। समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व था। सभी भारत की एकता के लिए बहुत संवेदनशील थे। बाबासाहेब आंबेडकर जी ने चेताया था कि समस्या यह है कि देश में जो विविधता से भरा जनमानस है, उसे किस तरह एकमत किया जाए। कैसे देश के लोगों को एक साथ होकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे देश में एकता की भावना पैदा हो। मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आजादी के बाद विकृत मानसिकता के कारण अगर सबसे बड़ा प्रहार हुआ है तो वह संविधान के मूलभाव पर प्रहार हुआ है। इस देश की प्रगति विविधता में एकता सेलिब्रेट करने में रही है। लेकिन गुलामी की मानसिकता में पैदा हुए लोग, जिनके लिए हिंदुस्तान 1947 में ही पैदा हुआ, वह विविधता में एकता को सेलिब्रेट करने के बजाय, उसमें इस तरह जहर बोते रहे कि उससे चोट पहुंचे।
जी-20 समिट में हमने विश्व के सामने वीमेन लेड डवलपमेंट पर विचार रखा था। अब इसकी चर्चा को अंजाम दिया। हम सांसदों ने मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया। इससे हमने महिलाओं की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित की। हर बड़ी योजना के मध्य में महिलाएं हैं। संविधान के 75वें वर्ष में भारत की राष्ट्रपति भी महिला हैं। यह हमारे संविधान की भावना की अभिव्यक्ति है। पीएम ने कहा कि सदन में लगातार महिला सांसदों की संख्या और योगदान बड़ा है। हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान, प्रतिनिधित्व देश के लिए गौरव दिलाने वाला रहा है।
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि संविधान निर्माण में नारी शक्ति की बड़ी भूमिका निभाई। संविधान सभा में 15 महिला सक्रिय सदस्य थीं। उन्होंने संविधान सभा की बहस को सशक्त किया। संविधान में उन्होंने जो सुझाव दिए, उनका संविधान निर्माण पर बड़ा प्रभाव पड़ा। दुनिया के कई देश महिलाओं को अधिकार नहीं दे सके। भारत में महिलाओं को वोट का अधिकार शुरू से दिया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि दूसरा कोट पढ़ रहा हूं राधाकृष्णन जी का। उन्होंने कहा था कि इस देश के लिए गणतांत्रिक व्यवस्था नई नहीं है। यह इतिहास की शुरुआत से ही है। तीसरा कोट मैं बाबासाहेब आंबेडकर का कह रहा हूं ऐसा नहीं है कि भारत के लोगों को पता नहीं है कि लोकतंत्र कैसा होता है। एक समय था जब भारत में कई गणतंत्र हुआ करते थे।
भारत का लोकतंत्र और अतीत बहुत ही समृद्ध रहा है। विश्व के लिए बहुत प्रेरक रहा है। इसीलिए भारत आज मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में जाना जाता है। मैं तीन महापुरुषों के कोट इस सदन के सामने पेश करना चाहता हूं। राजर्षि टंडन जी, उन्होंने कहा था कि सदियों के बाद हमारे देश में एक बार फिर ऐसी बैठक बुलाई गई है। यह हमारे मन में हमारे गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है। जब हम स्वतंत्र हुआ करते थे, जब सभाएं आयोजित की जाती थीं, जब विद्वान लोग चर्चा के लिए मिला करते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह पूरे देश और हम सबके लिए गौरव का पल है। यह लोकतंत्र का उत्सव मनाने का अवसर है। संविधान के 75 वर्ष की यादगार यात्रा और लोकतंत्र की यात्रा के मूल में संविधान निर्माताओं की दिव्य दृष्टि और योगदान है। यह उत्सव मनाने का पल है। खुशी की बात है कि संसद भी इस उत्सव में शामिल होकर अपनी भावना प्रकट कर रहा है। सभी सांसदों का आभार। 75 वर्ष की उपलब्धि साधारण नहीं है। जब देश आजाद हुआ, उस वक्त देश के लिए जो संभावनाएं थी, उन सभी संभावनाओं को निरस्त और परास्त करते हुए संविधान हमें यहां तक ले आया है। संविधान निर्माताओं के साथ मैं देश के नागरिकों को नमन करता हूं। संविधान निर्माताओं की भावना पर भारत का नागरिक हर कसौटी पर खरा उतरा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में पहुंच गए हैं। अब से कुछ ही देर में वे संविधान पर चर्चा में भाग लेंगे। पीएम मोदी के सदन में पहुंचते ही भाजपा सांसदों ने नारे लगाए।
सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जब हम संविधान की 75 साल की यात्रा की बात कर रहे हैं, तो उसके एक हिस्से में लिखा है इंडिया दैट इज भारत, अगर आप संविधान की चर्चा कर रहे हैं तो भारत बोलें, हिंदुस्तान नहीं। प्रस्तावना में लिखा है 'वी द पीपल ऑफ इंडिया', क्या हम भारतीय बन पाए हैं? क्या हम अपनी जाति, धर्म, संस्कृति से ऊपर उठकर भारतीय बन पाए हैं? क्या देश में फैली छुआछूत और भेदभाव खत्म हो पाया है? बहुत कुछ ऐसा है जो नहीं हुआ है, एक-दूसरे पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा।
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि राहुल गांधी ने हमेशा किसानों, गरीबों और मजदूरों की आवाज उठाई है। आज उन्होंने एकलव्य का उदाहरण दिया और यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि भाजपा सरकार के पास ऐसे विचार हैं जो गरीबों, मजदूरों और अन्नदाताओं को दबाते हैं।
संसद में संविधान पर चर्चा के दौरान संसद में एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि देश में मस्जिदें खतरे में आ गईं हैं। भाजपा का राष्ट्रवाद हिंदुत्व का राष्ट्रवाद है। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनको चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है। मुसलमान चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं किया जा रहा है। बीफ को लेकर मॉब लिचिंग हो रही है। वक्फ को लेकर कहा जाता है कि ये संविधान से जुड़ा नहीं है। जबकि धारा 26 में ऐसा लिखा है। वक्फ की जायदादों को छीना जा रहा है। उर्दू को खत्म किया जा रहा है। मुस्लिम संस्कृति को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान सच्चा है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के भाषण पर कहा, 'राहुल गांधी को इतिहास नहीं पता है। जिस राहुल गांधी के परिवार में सिर्फ संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं, उनकी दादी कई बार तानाशाह बनीं और वे दूसरों को नसीहत देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब भी संविधान का सहारा लिया तो गरीबों के लिए लिया और कांग्रेस ने जब भी सहारा लिया, तो तानाशाही के लिए लिया, अपने लिए लिया।'
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के भाषण पर पलटवार करते हुए कहा कि 'राहुल गांधी यह भी नहीं बता पाए कि भारतीय संविधान में कुल कितने पन्ने हैं।' ठाकुर ने कहा, 'ये जो किताब (संविधान) दिखाते हैं, इनको यह भी नहीं पता कि इस किताब में पन्ने कितने हैं। कभी राहुल जी इस किताब को खोलकर पढ़ तो लो।' भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि 'राहुल गांधी जो संविधान की किताब लेकर चलते हैं, उसी में लिखा है कि संविधान बनने के बाद से ही विधायिका और न्यायपालिका के बीच तनातनी रही। संविधान ने ही देश को बचाया। ये अंगूठा काटने की बात करते हैं, लेकिन इनके समय में सिखों के गले काटे गए। ये संविधान जेब में लेकर घूमते हैं, लेकिन कभी इसका पालन नहीं किया।'
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आप एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़ाते हैं। ये संविधान में कहां लिखा है। मुझे दिखाइए। हमारी विचारधारा, इंडी गठबंधन की विचारधारा, वो देश में संविधान की रक्षा करते हैं। आज ये बात सबके सामने है कि राजनीतिक समानता खत्म हो गई है। सामाजिक समानता, आर्थिक समानता नहीं रही। इसलिए हमारा अगला कदम जातीय जनगणना होगा। हम देश को दिखाना चाहते हैं कि आपने किन लोगों का कहां-कहां अंगूठा काटा है। उसके बाद हिंदुस्तान में एक नए तरीके का विकास होगा और नई तरीके की राजनीति होगी। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि 50 फीसदी आरक्षण की दीवार भी हम तोड़ेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि जब आप अदाणी को धारावी का बिजनेस देते हैं तो आप धारावी के छोटे व्यापारियों का अंगूठा काटते हैं। जब आप बंदरगाह, एयरपोर्ट अदाणी को देते हैं तो जो लोग ईमानदारी से व्यापार करते हैं आप उनका अंगूठा काटते हैं। लेटेरल एंट्री देकर देश के युवाओं का अंगूठा काटते हैं। देश के युवा प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी करते हैं। तो पेपर लीक कराकर आप उनका अंगूठा काटते हैं। देश के हजारों युवा सेना में जाने के लिए मेहनत करते थे, तो आपने अग्निवीर लाकर उनका अंगूठा काटा।
किसान आपसे एमएसपी मांगते हैं, मगर आप अदाणी-अंबानी को फायदा पहुंचाते हो तो आप किसानों का अंगूठा काटने का काम करते हैं। संविधान में कहीं नहीं लिखा कि एकाधिकार होना चाहिए, अग्निवीर होना चाहिए। संविधान में ये नहीं लिखा कि देश के युवाओं का अंगूठा काटना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि जैसे पहले हिंदुस्तान चलाया जाता था, वैसे ही आप आज भी चलाना चाहते हैं। पहले जब मैं जब छोटा था, तब दिल्ली के आसपास, एम्स के पास ही जंगल था। वैसे ही जंगल में हजारों साल पहले एक बच्चा सुबह उठकर तपस्या करता था। हर रोज सुबह वो धनुष उठाकर तीर कमान चलाता था और घंटे उसने तपस्या की और वर्षों तक तपस्या की। उसका नाम एकलव्य था। जब वह द्रोणाचार्य के पास पहुंचा तो गुरु द्रोणाचार्य ने उसे सिखाने से मना कर दिया कि आप स्वर्ण जाति से नहीं है तो मैं आपको नहीं सिखा सकता। राहुल गांधी ने कहा कि जैसे द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा काटा, वैसे ही आप हिंदुस्तान के युवाओं का अंगूठा काट रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि जब हम संविधान को देखते हैं तो हम देख सकते हैं कि संविधान में महात्मा गांधी, डॉ. आंबेडकर, पंडित नेहरू के विचार दिखते हैं, लेकिन ये विचार कहां से आए। ये विचार भगवान शिव, गुरु नानक, भगवान बासवन्ना, कबीर आदि से आए। हमारा संविधान बिना हमारी प्राचीन विरासत के बिना नहीं बन सकता था।
राहुल गांधी ने कहा कि सावरकर ने अपने लेखों में साफ लिखा है कि हमारे संविधान में कुछ भी भारतीय नहीं हैं। लड़ाई मनु स्मृति और संविधान के बीच की है। अब सवाल ये है कि आप सावरकर की बात को मानते हैं या फिर संविधान को। क्योंकि जब आप संविधान की तारीफ करते हैं तो आप एक तरह से सावरकर का विरोध करते हैं।
ए राजा ने शनिवार को केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तो देश में आपातकाल लगाकर केवल लोकतंत्र को आघात पहुंचाया, लेकिन इस सरकार ने संविधान की मूल संरचना के सभी तत्वों पर आक्रमण किया है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष कांग्रेस पर संविधान में कई संशोधन करने का आरोप लगाता है, लेकिन उसके समय संविधान की मूल संरचना के साथ तो छेड़छाड़ नहीं की गई। राजा ने कहा कि '1973 के केशवानंद भारती मामले में उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार संविधान के छह तत्व हैं-लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, कानून का शासन, समानता, संघीय ढांचा और स्वतंत्र न्यायपालिका।
द्रमुक सदस्य ने कहा, 'आप इन छह तत्वों को छू नहीं सकते।' उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'मीसा कानून (आपातकाल के समय) में केवल लोकतंत्र पर हमला हुआ था और उसे पूरी तरह दफन कर दिया गया था, लेकिन आपके शासन में सभी छह तत्वों- लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, कानून का शासन, समानता, संघीय ढांचा और स्वतंत्र न्यायपालिका, सबकुछ चले गए।'
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक राष्ट्र-एक चुनाव कहा, 'अगर इतनी ही जल्दी है तो प्रधानमंत्री मोदी आज सदन में आ रहे हैं, सरकार भंग कर दें और पूरे देश का चुनाव हो जाए। अगर एक राष्ट्र-एक चुनाव के लिए इतनी ही जल्दी है तो इससे अच्छा और क्या समय मिलेगा जब हम संविधान पर चर्चा कर रहे हैं तब पूरे देश की सरकारें आज ही भंग कर दें और चुनाव करा दें।'
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने संविधान पर चर्चा के दौरान कहा कि कांग्रेस सरकार ने उत्तर पूर्व के राज्यों पर ध्यान ही नहीं दिया। साल 2014 में पीएम मोदी के सत्ता संभालने के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों में बुनियादी ढांचे पर काम हुआ। रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारों में सबसे ज्यादा देश में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। रिजिजू ने कांग्रेस से सवाल किया कि कांग्रेस ने साल 1990 तक बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया?
भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान लोकसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मुझे गर्व है कि जब प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल शुरू हुआ तो उन्होंने संविधान की इसी भावना का पालन करते हुए अपनी सरकार का मंत्र इस देश के सामने रखा। और वह मंत्र है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।'
लोकसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने संविधान की चर्चा में अपनी बात रखी।
कांग्रेस सांसद के सुरेश ने कहा, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज संसद में बोलेंगे।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर उन्होंने कहा, 'हमने भाजपा और सरकार पर संविधान का सम्मान न करने का भी आरोप लगाया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कल संसद में इस बारे में बात की थी। आज भी हम इस पर बात जारी रखेंगे।'
आपदा प्रभावित वायनाड को आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर शनिवार को वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने कई अन्य कांग्रेस सांसदों के साथ मिलकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'सरकार वायनाड को विशेष पैकेज देने से इनकार कर रही है। हमने गृह मंत्री से अनुरोध किया है, हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। हिमाचल प्रदेश में भी इसी तरह की बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और वहां कांग्रेस की सरकार है। वे केंद्र से मदद मांग रहे हैं लेकिन फिर भी दोनों मामलों में केंद्र सरकार राजनीति के कारण पीड़ितों को उनका हक देने से इनकार कर रही है। वे भारत के नागरिक हैं। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।'
लोकसभा में संविधान पर चर्चा के दूसरे दिन आज शाम करीब 5 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान के 75 साल के उपलक्ष्य में चर्चा करेंगे। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि, विपक्ष अदाणी मामले पर इस दौरान हंगामा कर सकता है।