सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियों ने पांच अगस्त तक 287 करोड़ रुपये के 1.6 लाख से अधिक दावों के खिलाफ उचित कार्रवाई की है।
एक सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) या राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के कारण 210 अस्पतालों को पैनल से हटा दिया गया है और 188 अस्पतालों को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि 20.71 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 9.5 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं। मंडाविया ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने एबी-पीएमजेएवाई के तहत धोखाधड़ी और दुरुपयोग की रोकथाम, पता लगाने और निवारण की प्राथमिक जिम्मेदारी के साथ एक राष्ट्रीय धोखाधड़ी रोधी इकाई (एनएएफयू) की स्थापना की है।
इस योजना के तहत धोखाधड़ी विरोधी संरचना में केंद्रीय स्तर पर एनएएफयू है, इसके बाद राज्य धोखाधड़ी विरोधी इकाइयां हैं। मंत्री ने कहा कि एनएचए, एबी-पीएमजेएवाई के तहत संदिग्ध लेनदेन या संभावित धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि इन प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल योजना के कार्यान्वयन में स्वास्थ्य संबंधी धोखाधड़ी की रोकथाम, पता लगाने और निवारण के लिए किया जाता है और पात्र लाभार्थियों को उचित उपचार सुनिश्चित करने में सहायक होता है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) योजना 23 सितंबर, 2018 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य 12 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों (लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों) को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करना है।
मंडाविया ने कहा कि भारत सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरुआत एक मंच प्रदान करने के लिए की गई है जो प्रत्येक नागरिक के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) बनाने के लिए स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर स्वास्थ्य डेटा की अंतःक्रियाशीलता को सक्षम बनाता है। एबीडीएम में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए), हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर), स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (एचएफआर), और ड्रग रजिस्ट्री जैसी प्रमुख रजिस्ट्रियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एबीडीएम स्वास्थ्य सेवा को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, समावेशी, सुलभ और नागरिक केंद्रित बनाना चाहता है।
दवा निर्माता कंपनी को सभी विनिर्माण गतिविधियां बंद करने को कहा गया
सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अलर्ट के बाद पंजाब की एक दवा निर्माता कंपनी के परिसरों से एकत्र किए गए नमूने मानक गुणवत्ता के नहीं पाए गए, जिसके बाद उसे सभी विनिर्माण गतिविधियां बंद करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने संसद के निचले सदन में एक लिखित जवाब में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मार्शल द्वीप समूह और फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया में भारत निर्मित गुएफेनेसिन सिरप के एक बैच के लिए चिकित्सा उत्पाद अलर्ट जारी किया है।
रिपोर्टों के बाद, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य औषधि प्राधिकरण, पंजाब के साथ मिलकर पंजाब में मेसर्स क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड में एक संयुक्त जांच की। मंत्री ने कहा, 'जांच और विश्लेषण के लिए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के तहत विनिर्माण परिसरों से लिए गए दवा के नमूनों को 'मानक गुणवत्ता का नहीं' घोषित किया गया।
पर्यावरण राहत कोष से नहीं वितरित किया मुआवजा: सरकार
सरकार ने कहा है कि खतरनाक पदार्थों से प्रभावित व्यक्तियों की सहायता के लिए 2008 में स्थापित पर्यावरण राहत कोष से 2019 के बाद से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि 31 मार्च, 2023 तक इस कोष में 1,062 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। उन्होंने कहा, 2019 के बाद से पर्यावरण राहत कोष (ईआरएफ) से मुआवजे के रूप में कोई राशि वितरित नहीं की गई है।'
विधि आयोग ने बिजली टावर व ट्रांसमिशन लाइन बिछाने में मुआवजे पर सरकार को सौंपी रिपोर्ट
विधि आयोग ने बिजली टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों को बिछाने के मामले में भूमि मालिक के मुआवजे के कानूनी अधिकार से जुड़े प्रावधानों को बिजली अधिनियम, 2003 में शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग ने यह भी कहा कि चूंकि भूमि राज्य का विषय बनी हुई है, इसलिए कई राज्य सरकारें भुगतान की जाने वाली मुआवजे की मात्रा पर अलग-अलग नीतियां लेकर आई हैं।
आयोग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकारें अपनी नीतियां 2015 के दिशा-निर्देशों और 2020 के शहरी नियमों के अनुसार तैयार करें। इससे परियोजना लागत और भूमि मालिकों को दिए जाने वाले मुआवजे में निश्चितता आएगी। आयोग ने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और इलेक्ट्रिकिटी अधिनियम, 2003 के तहत टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना के कारण होने वाले नुकसान के लिए मुआवजा देने संबंधी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। जस्टिस (सेवानिवृत्त) ऋतु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा कि भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 लगभग डेढ़ शताब्दी से लागू है। बार बार के संशोधन से यह काफी प्रभावित हुआ है। आयोग ने कहा कि उसका मानना है कि दूरसंचार के क्षेत्र में हुई प्रगति और उस प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए समय और परिवेश के लिए अधिक उपयुक्त एक नया कानून बनाया जाना चाहिए। नया कानून मौजूदा कानून की खामियों को भी दूर करेगा।
सरकार ने लोकसभा को बताया, मतपत्र प्रणाली पर वापस जाने का प्रस्ताव नहीं
सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि चुनावों में वोट डालने की मतपत्र प्रणाली पर वापस जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। एक लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने सूचित किया है कि मतपत्र प्रणाली को फिर से शुरू करने के संबंध में कुछ ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग 1982 से ईवीएम का उपयोग करके चुनाव करा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीनों के उपयोग को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में स्पष्ट प्रावधानों के रूप में संसद की ओर से कानूनी रूप से मंजूरी दी गई है।