संसद का शीतकालीन सत्र अपने निर्धारित समय से छह दिन पहले शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में 97 फीसदी और राज्यसभा में 102 फीसदी कामकाज हुआ है। यह लगातार आठवां सत्र है, जिसकी अवधि कम की गई है।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च नामक संस्था द्वारा संकलित आंकड़ों से यह जानकारी मिली। शीतकालीन सत्र सात दिसंबर को शुरू हुआ और 29 दिसंबर तक चलना था। हालांकि, सदस्यों ने क्रिसमस और नये साल को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति से कार्यवाही पहले ही स्थगित करने का आग्रह किया था। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार 2020 में हुए बजट सत्र से अब तक के सभी संसद सत्र तय समय से पहले समाप्त हो गए।
वर्ष 2020 में कोविड-19 के मामले बढ़ने की वजह से बजट और मानसून सत्र की अवधि कम कर दी गयी। बजट सत्र 11 दिन पहले स्थगित कर दिया गया, वहीं मानसून सत्र तय समय से आठ दिन पहले समाप्त हो गया था। उस साल महामारी के कारण शीतकालीन सत्र आयोजित ही नहीं हुआ। पिछले साल बजट सत्र निर्धारित कार्यक्रम से 14 दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष की ओर से चीन के साथ सीमा पर तनाव के मुद्दे पर चर्चा की मांग की जा रही थी। लेकिन शीतकालीन सत्र समाप्त कर दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, 17वीं लोकसभा का 10वां सत्र समाप्त हो रहा है, जिसकी शुरुआत 7 दिसंबर को हुई थी। उन्होंने बताया कि इस सत्र के दौरान 13 बैठकें हुईं, जिनमें 68 घंटे 42 मिनट कामकाज हुआ। इस सत्र की कार्य उत्पादकता 97 फीसदी रही।
उन्होंने बताया कि सत्र के नव निर्वाचित सदस्य के रूप में समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने शपथ ली। वहीं, राज्यसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले सभापति जगदीप धनखड़ ने बताया कि इस दौरान 63 घंटे, 20 मिनट का कामकाज निर्थारित था, जबकि 64 घंटे 50 मिनट अर्थात करीब 102 फीसदी कामकाज हुआ।
धनखड़ ने सत्र के दौरान बतौर सभापति पहली बार सदन की कार्यवाही का संचालन किया। अपने पहले संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक जवाबदेही आयोग संबंधी अधिनियम (एनजेएसी) और कानून बनाने में संसद की संप्रभुता को लेकर टिप्पणी की थी।
इससे पहले गुरुवार को धनखड़ ने राज्यसभा में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक बयान को लेकर वक्तव्य दिया था। जिसका नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस सदस्य प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को विरोध करते हुए उसे सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। हालांकि, सभापति धनखड़ ने कहा कि उनका वक्तव्य आसन की निष्पक्षता से जुड़ा था।
इस शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में 2022-23 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को भी मंजूरी दी गई। सत्र के दौरान वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन विधेयक, उर्जा संरक्षण (संशोधन विधेयक), नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थम (संशोधन) विधेयक, समुद्री जलदस्युता रोधी विधेयक व विभिन्न राज्यों की कुछ जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करने के लिए विधेयकों को पारित किया गया।