संसद का इतिहास गरिमामय है। राज्यसभा के सभापति का स्थान ऊंचे ओहदे का और सम्मानित है। दशकों बाद पहली बार सदन में अलग नजारा दिखाई दिया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं, बहुत बर्दाश्त किया और झुकेंगे नहीं। जवाब में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद को मजदूर किसान का बेटा बताया और सभापति को खरी-खरी सुना दी। इसे पूरे सदन ने सुना और देश ने भी।
विपक्ष के 60 राज्यसभा सदस्य सभापति के खिलाफ 67(बी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे चुके हैं। इस नोटिस पर विपक्ष के किसी सदन के नेता के हस्ताक्षर नहीं हैं, लेकिन आज सभापति और नेता विपक्ष के बीच में हुई तकरार ने संसदीय कार्यवाही में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस पर भाजपा के राधामोहन अग्रवाल ने चर्चा शुरू की। राज्यसभा के वरिष्ठ अधिकारिक सूत्र का भी कहना है कि 28 साल की सेवा में उन्होंने ऐसा समय नहीं देखा था।
एक बार लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की तरफ पेपर फेंक दिए थे, लेकिन राज्यसभा में नेता विपक्ष और सभापति में ऐसी तकरार नहीं हुई थी। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजजू इस स्थिति के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मान रहे हैं। वहीं, जेपी नड्डा इस कोशिश को सोरोस मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास बता रहे हैं। राधामोहन अग्रवाल ने इतिहास का जिक्र करते हुए राज्यसभा में आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति का सम्मान ही नहीं करती। भाजपा के सुरेन्द्र नागर ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मुक्त कंठ तारीफ की। नीरज शेखर ने खुद को पीड़ित बताया। उन्होंने कहा कि आज जो टिप्पणी हो रही है, उससे देश दुखी है।
सभापति धनखड़ बनाम नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे
सदन में तब अजीब स्थिति पैदा हुई, जब सभापति जगदीप धनखड़ ने खुले अंदाज में विपक्ष को आसन से चेताया। सभापति ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं, चोरी नहीं सिखाएंगे। वह झुकेंगे नहीं, दबेंगे नहीं। देश की रक्षा में मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन कमजोर नहीं पड़ेंगे। सभापति ने कहा कि वह पूरा दिन सुनेंगे, सबको सुनेंगे। उन्होंने कहा कि मेहरबानी करके विपक्ष समझने की कोशिश करे।
सभापति ने कहा कि उन्होंने सदन के सदस्यों को इज्जत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने बहुत बर्दाश्त किया है। सभापति ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाना आपका अधिकार है। आप ले आए। इस पर चर्चा हो, लेकिन आपने तो संविधान की धज्जियां उड़ा दीं।
सभापति बोल रहे थे और उन्होंने इस बीच विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का नाम पुकारा। मल्लिकार्जुन खरगे खड़े हुए। सभापति को सीधा जवाब देते हुए कहा कि अगर आप किसान के बेटे हैं तो वह मजदूर किसान के बेटे हैं। वे बहुत मेहनत से कमाकर लाते थे। खरगे ने कहा कि उन्होंने सभापति से अधिक चुनौतियों का सामना किया है और वह सदन में सभापति की तारीफ सुनने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि देश के मुद्दों पर चर्चा करने आए हैं। खरगे ने सीधा आरोप लगाया और कहा कि सभापति विपक्ष के नेताओं को अपमानित करते हैं। कांग्रेस पार्टी को अपमानित करते हैं और सत्तापक्ष के नेताओं को प्रोत्साहित करते हैं।