संसद ने सोमवार को एक विशेष विधेयक पारित किया जो सामूहिक विनाश के हथियारों के वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है और केंद्र को ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों की वित्तीय संपत्ति और आर्थिक संसाधनों की जब्त करने का अधिकार देता है।
सामूहिक विनाश के हथियार और उनकी वितरण प्रणाली (गैरकानूनी गतिविधियों का निषेध) संशोधन विधेयक, 2022 विदेश मंत्री एस.जयशंकर द्वारा पेश किया गया जिसे राज्यसभा में ध्वनिमत के साथ पारित किया गया। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी समेत विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों ने अपना विरोध जारी रखा। इस विधेयक को पहले लोकसभा ने अप्रैल में मंजूरी दी थी।
मौजूदा कानून में सामूहिक विनाश के हथियारों का वित्तपोषण शामिल नहीं : विदेश मंत्री
विधेयक पर बहस के दौरान जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि प्रस्तावित कानून पर बोलने वाले सभी सदस्यों ने माना कि आतंकवाद एक गंभीर खतरा है और इसके सामूहिक विनाश (डब्ल्यूएमडी) के हथियार हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में केवल व्यापार शामिल है और सामूहिक विनाश के हथियारों के वित्तपोषण को शामिल नहीं किया गया है। जय़शंकर ने कहा कि इस अंतर को भरने की जरूरत है।
'मौजूदा कानून में संशोधन देश सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए अच्छा है'
विदेश मंत्री ने कहा, मौजूदा कानून की कमी को ध्यान में रखते हुए हम यह संसोधन लाए हैं। यह देश की सुरक्षा के लिए अच्छा है। यह देश की प्रतिष्ठा के लिए अच्छा है।
संशोधन विधेयक मौजूदा कानून में एक नई धारा 12ए को सम्मिलित करने का प्रयास करता है जिसमें कहा गया है कि "कोई भी व्यक्ति किसी भी गतिविधि को वित्तपोषित नहीं करेगा जो इस अधिनियम के तहत या संयुक्त राष्ट्र (सुरक्षा परिषद) अधिनियम, 1947 या किसी अन्य प्रासंगिक अधिनिययम के तहत निषिद्ध है। सामूहिक विनाश के हथियारों और उनके वितरम के संबंध में या ऐसे किसी अधिनियम के तहत जारी किए गए आदेश द्वारा समय पर लागू हो।"