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Parliament: ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक को संसद से मंजूरी, राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ प्रस्तावित कानून

Wed, 25 Mar 2026 07:56 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Parliament: ट्रांसजेंडर संसोधन विधेयक बुधवार को राज्यसभा में भी ध्वनिमत के साथ पारित हो गया है। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री वीरेंद्र ने कहा कि यह समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास है। पढ़िए रिपोर्ट-
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भारतीय संसद - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक को बुधवार को संसद से मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनिमत के साथ पारित कर दिया है। इस विधेयक के जरिये समाज में अलग-अलग यौन पहचान को कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इससे पहले इस विधेयक को मंगलवार को लोकसभा में पारित किया गया था। 
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चर्चा के दौरान सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री ने क्या कहा?
सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री वीरेंद्र ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा, यह विधेयक समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास है। उन्होंने कहा,विधेयक केवल उन लोगों को सुरक्षा देने का लक्ष्य रखता है, जो जैविक कारणों से भेदभाव का सामना करते हैं। 

मंत्री ने यह भी कहा, संशोधन के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिलती रहेगी। (नरेंद्र) मोदी सरकार उन सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जो जैविक कारणों से पीड़ित हैं। ऐसे लोग मुख्यधारा में आएं ताकि उन्हें अलग-थलग नहीं रहना पड़े। मंत्री ने ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 30 से अधिक राज्यों में ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड बनाए गए हैं। यह विधेयक प्रशासनिक स्पष्टता लाएगा और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
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ये भी पढ़ें: 'शुक्रवार को राज्यसभा में पेश होगा वित्त विधेयक, वीकेंड पर नहीं चलेगी संसद', रिजिजू ने दी जानकारी

राज्यसभा में आम सहमति से पारित हुआ विधेयक
राज्यसभा में विपक्ष ने प्रस्तावित संशोधनों को खारिज किया। जिसके बाद आम सहमति से विधेयक पारित कर दिया गया। विधेयक को चयन समिति को भेजने के विपक्ष के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। 

विधेयक में 'ट्रांसजेंडर' शब्द की सटीक परिभाषा दी गई है और इसमें यह तय किया गया है कि अलग-अलग यौन अभिविन्यास (जैसे गे, लेस्बियन, बाइसेक्सुअल आदि) और जो लोग अपनी यौन पहचान खुद तय करते हैं, उन्हें इस कानून के दायरे में नहीं रखा जाएगा। यह विधेयक इस महीने की शुरुआत में लोकसभा में पेश किया गया था।

आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ गैरबराबरी को तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक में एक ऐसा प्रावधान है, जिसमें किसी को ट्रांसजेंडर बनने के लिए प्रेरित करना अपराध माना गया है, जो अस्पष्ट और जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से परिवार, डॉक्टर और ट्रांसजेंडर समुदाय की मदद करने वाले लोग भी निशाने पर आ सकते हैं, इसलिए इस विधेयक को चयन समिति को भेजकर परामर्श लेना चाहिए। 
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ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समान अधिकार नहीं मिल रहे: महुआ माझी
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माझी ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समान अधिकार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें अवसर दिया जाए तो वे किसी से कम नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अमर पाल मौर्य ने भी विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लिया। 


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