संसद ने योग्य वित्तीय अनुबंध के द्विपक्षीय नेटिंग को कानूनी ढांचा मुहैया कराने वाले विधेयक को पारित कर दिया है। रविवार को लोकसभा ने बिल को पारित किया था, जिसके बाद बुधवार को राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, देश में वित्तीय स्थिरता के लिए यह बिल काफी महत्वपूर्ण है। जब दो पक्ष एक दूसरे की देनदारियों का निपटान इस प्रकार करते हैं कि जिसके ऊपर ज्यादा देनदारी हो, वह एक तय राशि का भुगतान दूसरे के पक्ष में करे, तो उसे नेटिंग कहते हैं।
बिल पर चर्चा के दौरान वित्तमंत्री ने कहा, यह बिल दो काउंटर पार्टियों के बीच द्विपक्षीय नेटिंग को मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है। बहुपक्षीय नेटिंग का पहले से ध्यान रखा गया है। कुल वित्तीय अनुबंध में से द्विपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 40 फीसदी और बहुपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। 2008 में आए वित्तीय संकट से सबक लेते हुए बिल को लाया गया है।
अगर यह विधेयक 2017 में उपलब्ध होता, बैंकों के पास कर्ज देने के लिए 42,194 करोड़ रुपये होते, लेकिन बैंकों ने इसे अपने पास ही रखा। वित्तीय बाजार के लिए यह विधेयक आवश्यक था। जब अर्थव्यवस्था में फंड की जरूरत होती है तो बैंकों में रखा पैसा उपलब्ध नहीं हो पाता। इस विधेयक तरलता बढ़ेगी।
विपक्षी दलों ने संसद परिसर में मार्च निकाला
राज्यसभा की कार्यवाही के बहिष्कार की घोषणा के बाद बुधवार को कृषि बिल के खिलाफ विपक्षी दलों के सदस्यों ने संसद परिसर में मार्च निकाला और विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध मार्च में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, जयराम रमेश, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन, समाजवादी पार्टी की जया बच्चन, त्रिरुचि शिवा, केके रागेश आदि हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर ‘किसान बचाओ, मजदूर बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ जैसे नारे लगा रहे थे।
संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। इससे पूर्व विपक्षी दलों के नेता आजाद के कक्ष में जुटे। उन्होंने संसद में पारित कृषि विधेयकों पर अगली रणनीति पर चर्चा की।