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संसद का मानसून सत्र: JPC में वोट के बाद रिपोर्ट पेश होने वाली थी, तभी आया संदेश-अभी नहीं...; क्या हैं समीकरण?

सार

संसद के मानसून सत्र में सरकार कई विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी। हालांकि, एक बिल ऐसा भी है जिसकी रिपोर्ट संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में वोटिंग के बाद पेश होने वाली थी। हालांकि, अचानक आए संदेश और बदलते समीकरणों के चलते सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। जानिए पूरा मामला
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पीएम सीएम को हटाने वाले बिल पर बदलते समीकरणों के चलते सरकार ने खींचा कदम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आरोपों में पद से हटाने के प्रावधान वाली मसौदा रिपोर्ट पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक अंतिम मुकाम पर थी। दो  सिफारिशों पर मतदान हो चुका था और रिपोर्ट मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी थी। तभी एक फोन कॉल आया और पूरी पटकथा बदल गई।

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जेपीसी की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने अचानक घोषणा की-रिपोर्ट फिलहाल संसद में पेश नहीं की जाएगी। इस मुद्दे पर और विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। इस एक फैसले ने 30 दिन से अधिक हिरासत में रहने पर पीएम, सीएम और मंत्रियों की सदस्यता तथा पद पर असर डालने से जुड़े 130वें संविधान संशोधन विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

सूत्रों के अनुसार, सरकार को आशंका थी कि यह विधेयक विपक्ष के लिए नया राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। हाल में मतभेद उभरने के बावजूद इस विधेयक के बहाने विपक्षी दल फिर एकजुट हो सकते थे। परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे विषयों पर विपक्षी एकता में बड़ी सेंध लगाने के बाद भी सरकार ऐसा कोई विवाद नहीं चाहती थी, जिससे विपक्ष को किसी भी तरह एकजुट होने का मौका मिल सके।
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दिलचस्प यह भी रहा कि जेपीसी में जिन दो सिफारिशों पर मतदान हुआ, उनमें सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने भी अलग रुख अपनाया। इससे संकेत मिले कि सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर भी पूरी तरह एकमत स्थिति नहीं है।

बैठक में क्या हुआ?
विपक्षी सदस्यों ने हर सिफारिश के लिए मतदान की मांग कर दी। पहली सिफारिश थी...मंत्रियों को हटाने के स्थान पर निलंबन शब्द का प्रयोग। दूसरी...सिर्फ ऐसे मामलों में तीस दिन की हिरासत के बाद कार्रवाई हो, जिस अपराध में कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान हो। दोनों सिफारिशों को बहुमत भी मिल गया, पर सत्ता पक्ष के कुछ लोगों ने खिलाफ मत दिया। तीसरी सिफारिश पर मतदान शुरू होने से पहले ही सारंगी ने रिपोर्ट टालने की घोषणा कर दी।

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