संसद का मानसून सत्र आज खत्म होने जा रहा है। लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। हालांकि अभी राज्यसभा में चर्चा जारी है। बहरहाल यह पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया और संसद में कोई उल्लेखनीय काम नहीं हो सका। गुरुवार को भी संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखे और दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया।
सत्ता और विपक्ष दोनों ने संसद परिसर में किया प्रदर्शन
सत्ताधारी भाजपा ने झारखंड में छात्र आंदोलन के मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरा। संसद परिसर के मकर द्वार पर भाजपा सांसदों ने धरना प्रदर्शन किया और नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा।
वहीं विपक्षी सांसदों ने भी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने एक बंदर की छोटी प्रतिमा के साथ विवादित नारेबाजी करते हुए कहा कि '56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर'। टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि सदन चलाना विपक्ष की नहीं बल्कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन सरकार ऐसा करने में असफल रही।
विपक्ष का आरोप- सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी
टीएमसी सांसद ने कहा, 'विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह के भाषण सुनने में दिलचस्पी नहीं रखता है। हम बस ये चाहते हैं कि सरकार ये बताए कि पैलेट गन चलाने के आदेश किसने दिए, लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।'
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि 'सरकार की जवाबदेही होनी चाहिए। सरकार की वजह से पूरा संसद सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया।' कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद सत्र के आखिर में आकर अमित शाह ने कहा कि वे सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम पूछना चाहते हैं कि बीते 20 दिनों से वे कहां थे। अमित शाह लगातार संसद आ रहे थे, लेकिन वे सदन नहीं आए। इससे पता चलता है कि वे खुद नहीं चाहते कि सदन चले। विपक्ष का काम मुद्दे उठाना है और सरकार का काम जवाब देना। अगर उन्होंने राहुल गांधी की बात पहले ही सुन ली होती तो आज ये स्थिति नहीं बनती।
गिरिराज सिंह बोले- लोकतंत्र किसी की जागीर नहीं
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को हंगामे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने घर की तरह सदन चलाना चाहते हैं। संसद, संसदीय व्यवस्था के आधार पर चलती है। राहुल गांधी ने सोचा कि उनकी वजह से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ और अब वे गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री से भी इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन लोकतंत्र किसी की जागीर नहीं है।