NIA ने 2020 से अब तक 301 मामलों में चार्जशीट दाखिल की, 97% से ज्यादा मामलों में सजा
वहीं मामले में राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वर्ष 2020 से 29 जुलाई 2025 तक कुल 301 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में सजा दिलाने की दर 97.08% है, जो बताता है कि एजेंसी के कामकाज में कितनी मजबूती और सटीकता है। यह जानकारी उन्होंने एक सवाल के जवाब में दी, जिससे यह भी साफ होता है कि आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां कठोर और प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं।
राज्यसभा में नित्यानंद राय बोले- CRPF की बटालियन कैंपिंग साइट बिहार के औरंगाबाद में चालू
सीआरपीएफ के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि सीआरपीएफ (सीआरपीएफ) की बटालियन कैंपिंग साइट बिहार के औरंगाबाद में अब संचालित हो रही है, और वहां रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की एक कंपनी तैनात है। उन्होंने कहा कि यह कैंप सरकार द्वारा मंजूर किए गए 25 बटालियन कैंपिंग साइट्स में से एक है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है।
अब तक इस कैंप में 120 जवानों के लिए एक बैरक और चारदीवारी का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं। मंत्री ने बताया कि कैंप के लिए बाकी जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू किया जाएगा।
सीआरपीएफ के जवानों ने अब तक लगाए 6 करोड़ से ज्यादा पौधे
इसके साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ये भी बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने 31 दिसंबर 2024 तक कुल 6,10,92,555 पौधे लगाए हैं। यह काम देशभर में चलाए गए प्लांटेशन ड्राइव के तहत किया गया। उन्होंने बताया कि यह अभियान देश के सभी 28 राज्यों (जिसमें झारखंड भी शामिल है) और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया गया है। इस अभियान के तहत 2,728 नर्सरियां विकसित की गई हैं और 1,703 वटिकाएं (उद्यान) शहीदों के नाम समर्पित की गई हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
रेल मंत्री वैष्णव ने भी दी अहम जानकारी
इसी दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि भारतीय रेलवे के सभी मुख्य यात्री कोचों में अब बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं। इससे रेल की पटरियों और उपकरणों पर मानव मल के कारण होने वाला जंग अब नहीं होता और सफाई व्यवस्था में भी काफी सुधार हुआ है। रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे ने जीरो-डिस्चार्ज बायो-टॉयलेट सिस्टम अपनाया है, जिससे ट्रेन से सीधे पटरियों पर गंदगी नहीं गिरती। यह काम मिशन मोड में किया गया है और अब सभी यात्री कोच जिनमें टॉयलेट हैं, उनमें बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत जागरूकता
अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि हर साल स्वच्छ भारत अभियान के दौरान यात्रियों को टॉयलेट की सफाई और सही इस्तेमाल को लेकर जागरूक किया जाता है। उन्होंने कहा कि गैर-बायोडिग्रेडेबल चीजों (जैसे प्लास्टिक) से बायो-टॉयलेट जाम न हों, इसके लिए भी जानकारी दी जाती है। रेल मंत्री ने बताया कि अब स्टेशनों और पटरियों पर बदबू और गंदगी नहीं दिखती। इससे न सिर्फ स्वच्छता बढ़ी है, बल्कि ट्रेनों और पटरियों की मेंटेनेंस भी पहले से बेहतर हो गई है। रेलवे का यह कदम पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है और यात्रियों को साफ-सुथरा सफर मिल रहा है।
लोकसभा में मर्चेंट शिपिंग बिल पास, विपक्ष के विरोध के बीच कार्यवाही टली
लोकसभा ने बुधवार को मर्चेंट शिपिंग बिल 2024 को मंजूरी दी। यह बिल मर्चेंट शिपिंग के नियमों को नया रूप देने और समुद्री दुर्घटनाओं की जांच के लिए बनाया गया है। इसके बाद ही सदन की कार्यवाही विपक्ष के जोरदार विरोध के कारण स्थगित कर दी गई। केंद्रीय मंत्री सरबनंद सोनोवाल ने बिल पर बात की, उसके बाद भाजपा के कप्तान बृजेश चौटा और मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल ने बिल का समर्थन किया। विपक्ष बिहार के चुनाव सूची संशोधन पर चर्चा कराने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा था।
यह मानसून सत्र में लोकसभा द्वारा पास किया गया दूसरा बिल है। मंगलवार को गोवा में अनुसूचित जनजाति आरक्षण से जुड़ा एक बिल पास किया गया था। संसद कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने विपक्ष से अपील की कि वे बिलों पर चर्चा में सहयोग करें और सदन में व्यवधान न डालें। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष विरोध करता रहा तो सरकार को अपनी विधायी कार्यसूची पारित कराने के लिए संसद की मंजूरी लेना पड़ेगा।
बता दें कि मर्चेंट शिपिंग बिल सरकार को भारत या उसकी तटीय जल सीमा में बिना राष्ट्रीयता के जहाजों को रोकने और जांच करने का अधिकार देता है। यह 1958 के पुराने मर्चेंट शिपिंग एक्ट को खत्म कर नए और आधुनिक नियम लाता है, जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं।