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संसद में कांग्रेस के हंगामे पर शाह नाराज: बोले- 1962 में हड़पी गई भारत की जमीन, RGF को मिला था चीन से अनुदान

Tue, 13 Dec 2022 01:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेहरू जी के चीन प्रेम के चलते भारत की सुरक्षा परिषद में सदस्यता बलि चढ़ी थी। 1962 में चीन ने हजारों हेक्टेयर भूमि हड़पी।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भारत-चीन के बीच झड़प के मुद्दे को लेकर विपक्ष की तरफ से हंगामे पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में आज विपक्ष ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। मैं इस कृत्य की निंदा करता हूं। उन्होंने इस पूरे हंगामे के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही कांग्रेस के चीन से संबंध होने का आरोप लगाते हुए राजीव गांधी फाउंडेशन पर भी टिप्पणी की। 
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इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ कहा कि रक्षा मंत्री संसद में भारत-चीन की सेना के बीच हुई झड़प पर बयान देंगे फिर भी संसद को बाधित किया गया। इसी पर अमित शाह ने कहा कि चीन पर कांग्रेस का दोहरा रवैया है। भारतीय सैनिकों ने कुछ ही देर में चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया था। भारत की एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं हुआ है। शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेहरू जी के चीन प्रेम के चलते भारत की सुरक्षा परिषद में सदस्यता बलि चढ़ी थी। 1962 में चीन ने हजारों हेक्टेयर भूमि हड़पी।" 

उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को चीन से मोटी रकम मिलती है। राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से पैसे मिले। गृह मंत्री ने कहा, "प्रश्नकाल की सूची में प्रश्न संख्या 5 देखने के बाद मुझे इनकी (कांग्रेस) चिंता समझ में आई। सवाल राजीव गांधी फाउंडेशन के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को रद्द करने के संबंध में था। अगर वे अनुमति देते तो मैं संसद में जवाब देता कि राजीव गांधी फाउंडेशन को 2005-2007 के वित्तीय काल में दौरान चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपये का अनुदान मिला, जो FCRA के अनुसार उचित नहीं था, इसलिए गृह मंत्रालय ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इसका पंजीकरण रद्द किया। 
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संसद भवन परिसर में शाह ने कहा, यह पहले से तय था कि तवांग हिंसा पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बयान देंगे। बावजूद इसके प्रश्नकाल नहीं चलने देने की वजह प्रश्नों की सूची में गांधी परिवार द्वारा संचालित राजीव गांधी फाउंडेशन का चीनी दूतावास से अनुदान लेने के कारण एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जाने का सवाल भी था। कांग्रेस को पता था कि इस सवाल के कारण संसद में उसका दशकों से चला आ रहा चीनी प्रेम उजागर हो जाता। देश को यह पता चल जाता कि देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के चीनी प्रेम पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसी) की स्थायी सदस्यता कुर्बान करनी पड़ी।

शाह ने कहा, अगर प्रश्नकाल चलता तो मैं संसद को बताता कि साल 2005-06 और साल 2006-07 में राजीव गांधी फाउंडेशन ने एफसीआरए कानूनों का उल्लंघन कर चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपये का अनुदान लिया। चूंकि विदेशी मदद मामले में सभी कानूनी औपचारिकता पूरी नहीं की गई, इसलिए फाउंडेशन का पंजीकरण रद्द कर दिया गया। फाउंडेशन का पंजीकरण सामाजिक कार्य करने वाले संगठन की सूची में शाामिल है। बावजूद इसके फाउंडेशन ने चीनी दूतावास से भारत-चीन के विकास से जुड़े शोध के लिए अनुदान लिया।

गृह मंत्री ने फाउंडेशन और उसके द्वारा किए गए शोध को लेकर कांग्रेस पर सवाल दागे। पूछा, कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसके शोध के विषय और निष्कर्ष क्या थे? क्या साल 1962 में चीन द्वारा भारत की हजारों हेक्टेयर भूमि पर कब्जा शोध का विषय था? क्या फाउंडेशन के शोध के विषय में यह सवाल भी शामिल था कि जब हमारे जांबाज जवान चीनी सेना का सामना कर रहे थे तो चीनी दूतावास के अधिकारियों को डिनर पार्टी देने वाले कौन था? 

चीन ने अरुणाचल प्रदेश का सीएम रहते दोरजी खांडू का वीजा आवेदन खारिज करने के साथ तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के अरुणाचल यात्रा पर आपत्ति जाताई थी। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए स्ट्रेपल वीजा जारी करना शुरू किया था। इसके अलावा कांग्रेस के सत्ता में रहते चीन ने अरुणाचल प्रदेश और तत्कालीन नेफा पर दावा किया था। यूपीए शासन में चीन की धमकी के कारण सरकार ने सीमा पर बुनियादी ढांचे का निर्माण बंद कर दिया था। क्या ये सारे विषय शोध का हिस्सा थे। अगर थे तो इसका निष्कर्ष सामने आना चाहिए।

कांग्रेस की तिजोरी में चीन का पैसाः प्रधान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया, तवांग में हुई घटना को लेकर रक्षा मंत्री के बयान के आश्वासन के बाद भी प्रश्नकाल स्थगित करना तो कांग्रेस का एक बहाना था। कांग्रेस की तिजोरी में चीन के पैसे और कांग्रेस-चीन समझौते से सबका ध्यान जो भटकाना था। एक परिवार की ऐतिहासिक गलतियों को भी तो छुपाना था। कांग्रेस जितना भी शोर मचा ले, चाहे जो भी हथकंडे अपना ले, वह देश को गुमराह नहीं कर पाएगी।
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