संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर शुक्रवार को जोरदार चर्चा हुई। इस दौरान विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो पार्टी शक्ति' की बात करती है, उसे पहले अपने संगठन के भीतर महिलाओं को उचित स्थान और सम्मान देना चाहिए।
कल्याण बनर्जी ने सदन में आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि भाजपा के 242 लोकसभा सांसदों में केवल 41 महिलाएं हैं। इसी तरह राज्यसभा में भाजपा के 106 सदस्यों में से सिर्फ 18 महिला सांसद हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर भाजपा सच में महिला सशक्तीकरण चाहती है, तो उसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 50 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने चाहिए।
परिसीमन को लेकर भी कल्याण बनर्जी ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर महिला आरक्षण देना है, तो इसे तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने इसे नौटंकी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ लोगों को बरगला रही है। कल्याण बनर्जी ने कहा, आप लोग सिर्फ 'जय श्रीराम' कहते हैं, लेकिन हम दुर्गा और काली की पूजा करते हैं। हम 'जय सिया राम' कहते हैं, क्योंकि राम बिना सीता के अधूरे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान उनकी संस्कृति का हिस्सा है। इस दौरान उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तारीफ करते हुए उन्हें अच्छा इंसान बताया और सुझाव दिया कि स्पीकर के पद पर भी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
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वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, जब आपकी सरकार 2024 में बनी, तो आपने जनगणना तुरंत क्यों शुरू नहीं कराई? इसके लिए ढाई साल का इंतजार क्यों किया? उन्होंने आरोप लगाया कि अब बिना जरूरी आंकड़ों के महिला आरक्षण लागू करने की जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
डिंपल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि भाजपा परिसीमन का इस्तेमाल खुद को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना को इस प्रक्रिया से हटाने की कोशिश इसलिए की जा रही है, ताकि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण न दिया जा सके।
डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूपी में गांव-गांव में प्राइमरी स्कूल बंद किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं की प्रगति पर असर पड़ेगा। उन्होंने उन्नाव कांड में कुलदीप सिंह सेंगर का जिक्र किया और मणिपुर की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। साथ ही उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन मामलों पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
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