मध्य प्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर-प्रह्लाद पटेल के नाम रेस में
दरअसल, नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश की कमान सौंपने की चर्चा जोरों पर है। केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। वे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के करीबी के रूप में भी देखे जाते हैं, इसीलिए इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन चुनावों के दौरान ही एक विवादित वीडियो के सामने आ जाने के बाद उनकी दावेदारी कुछ कमजोर हो गई है।
पिछड़े समुदाय से आने वाले प्रह्लाद सिंह पटेल को भी मध्य प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। पिछड़े समुदाय से आने के कारण वे भाजपा की राजनीति को खूब सूट भी करते हैं। मध्यप्रदेश में लगभग आधी आबादी पिछड़े समुदाय की है। यही कारण है कि अनुमान है कि भाजपा इस बार भी मध्य प्रदेश में किसी पिछड़े चेहरे को ही मैदान में उतारेगी। एमपी के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछड़े समुदाय से आने के कारण ही अब तक पार्टी की पहली पसंद बने हुए थे।
जिस तरह की चर्चा चल रही है, शिवराज सिंह चौहान को उनके पद से हटाकर बीजेपी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर प्रदेश में नया नेतृत्व विकसित चाहती है। शिवराज सिंह चौहान को हटाए जाने के बाद इसे पिछड़ा विरोधी कदम करार दिया जा सकता है जो भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। यदि उनकी जगह पर आने वाला नया चेहरा भी पिछड़े समुदाय से हो तो पिछड़े समुदाय के मतदाताओं के बीच कोई भ्रम की स्थिति पैदा होने से बचा जा सकेगा। इस समीकरण पर भी प्रह्लाद सिंह पटेल भाजपा की पहली पसंद हो सकते हैं।
गोमती साई की खुल सकती है किस्मत
भाजपा ने आदिवासी मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ बनाई है। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासी मतदाताओं ने भाजपा का अच्छा साथ दिया है। यही कारण है कि अटकलें लगाई जा रही हैं कि मोदी किसी आदिवासी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर इस समुदाय को अपने साथ और मजबूती से जोड़ने का काम कर सकते हैं। अगले चार महीने के अंदर लोकसभा चुनाव होना है। लोकसभा चुनाव में विपक्ष आदिवासियों का मुद्दा उठा सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा आदिवासी चेहरे पर ही गांव खेलेगी। इस पैमाने पर गोमती साइ और अरुण साव पार्टी की जरूरत पर खरे उतरते हैं।
महिला होने के नाते गोमती साइ को इस दौड़ में आगे माना जा रहा है क्योंकि मोदी महिलाओं को आगे बढ़ाने की राजनीति कर रहे हैं और उन्हें चुनावों में इसका लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने महिलाओं को एक जाति के रूप में भी चित्रित करने की कोशिश की है। जिस तरह पार्टी की लाडली योजनाओं, महतारी वंदन योजना और महिलाओं को आरक्षण देने का मुद्दा सफल हुआ है, मोदी महिलाओं के बीच अपनी स्वीकार्यता और बढाने के लिए महिला मुख्यमंत्री देने का दांव भी खेल सकते हैं। छत्तीसगढ़ से किसी आदिवासी और महिला चेहरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही है। इस पैमाने पर गोमती साई मोदी की पहली पसंद हो सकती हैं।